नई दिल्ली। पद्मश्री से सम्मानित साहित्यकार, कवि और समाजशास्त्री स्वर्गीय डॉ. श्याम सिंह शशि की प्रथम पुण्यतिथि पर आयोजित स्मृति व्याख्यानमाला में देश के अनेक प्रख्यात साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का आयोजन चाणक्यपुरी स्थित सिविल सर्विसेज ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट के सभागार में किया गया।

मुख्य अतिथि के रूप में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि आज विश्व को “करुणा के वैश्वीकरण” की आवश्यकता है और इसकी शुरुआत भारत से हो सकती है। उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण अब केवल बाजारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अनेक सामाजिक बुराइयाँ भी वैश्विक रूप ले चुकी हैं। उनके अनुसार समृद्धि महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल भौतिक प्रगति ही पर्याप्त नहीं है; मानवीय मूल्यों का विस्तार भी उतना ही आवश्यक है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद के महासचिव डॉ. श्याम परांडे ने की। उन्होंने डॉ. श्याम सिंह शशि के बहुआयामी व्यक्तित्व और साहित्यिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका लेखन समाज और संस्कृति की गहरी समझ का प्रमाण है।

विशिष्ट अतिथि के रूप में भारत सरकार के पूर्व रक्षा सचिव और राज्यसभा के पूर्व महासचिव डॉ. योगेंद्र नारायण ने विकसित भारत की अवधारणा पर विचार रखते हुए कहा कि ज्ञान और तकनीक की भूमिका आने वाले समय में निर्णायक होगी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर वैश्विक सम्मेलन आयोजित कर रही है और वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की दिशा में प्रयास जारी हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकास का मॉडल भारत की सांस्कृतिक और नैतिक परंपराओं के अनुरूप होना चाहिए।

एएएफटी के संस्थापक एवं कुलाधिपति डॉ. संदीप मारवाह ने डॉ. शशि को ‘करुणा की प्रतिमूर्ति’ बताते हुए कहा कि उन्होंने 400 से अधिक पुस्तकों की रचना कर साहित्य जगत में अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के विचार और भावनाएं ही उसके व्यक्तित्व का निर्माण करती हैं, और डॉ. शशि इसका जीवंत उदाहरण थे।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. शशि की पौत्री संस्कृति सिंह द्वारा रचित पुस्तक ‘नेविगेटिंग द इनरसेल्फ’ का लोकार्पण किया गया। साथ ही ‘सभ्यता संस्कृति’ पत्रिका के विशेषांक का भी अनावरण हुआ। कार्यक्रम का संचालन संस्कृति सिंह ने किया।

व्याख्यानमाला में सुमेधा सत्यार्थी, कवयित्री अनुभूति चतुर्वेदी, लीलावती शशि, डॉ. आलोक कुमार सिंह, डॉ. ऋचा सिंह, प्रो. धर्मवीर महाजन, डॉ. शकुंतला कालरा, पूर्व राजदूत विद्यासागर सहित अनेक साहित्यकार, शिक्षाविद् और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रोताओं ने भाग लेकर डॉ. श्याम सिंह शशि को श्रद्धासुमन अर्पित किए।