नई दिल्ली: भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का बुधवार को ट्रायल किया गया। यह परीक्षण जींद रेलवे स्टेशन से ललितखेड़ा स्टेशन तक लगभग 20 किलोमीटर तक सफल रहा। इसके बाद ट्रेन को डीजल इंजन की मदद से मोहाना स्टेशन तक ले जाया गया। रेलवे अधिकारियों ने ट्रायल को संतोषजनक बताया।

ट्रायल का पूरा कार्यक्रम

ट्रायल सुबह 7 बजे यार्ड से शुरू हुआ। पहले ट्रेन को डीजल इंजन की सहायता से हांसी रोड पुल के पास लाया गया, जहां थोड़ी देर के लिए रुकाव था। इसके बाद ट्रेन को वापस जंक्शन पर ले जाकर सुबह 8:25 बजे सोनीपत की ओर रवाना किया गया।

सुबह 8:40 बजे, डीजल इंजन की मदद से ट्रेन पिंडारा तक पहुंची। यहां से डीजल इंजन हटाकर हाइड्रोजन इंजन से ट्रेन का रनिंग ट्रायल ललितखेड़ा तक किया गया। दोनों स्टेशनों के बीच ट्रेन को दो बार चलाया गया और ट्रेन की स्पीड लगभग 70 किलोमीटर प्रति घंटा रही।

इसके बाद ट्रेन को डीजल इंजन के साथ गोहाना और मोहाना तक ले जाया गया और फिर वापस जींद लाया गया। पूरे ट्रायल के दौरान तकनीकी टीम ने हर कदम पर निगरानी रखी।

तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा

ट्रायल में ट्रेन की गति, ब्रेकिंग सिस्टम, हाइड्रोजन फ्यूल सेल और सुरक्षा मानकों की जाँच की गई। भंभेवा स्टेशन पर ट्रेन के इंजन और कोच का तकनीकी निरीक्षण भी किया गया। अधिकारियों ने बताया कि सभी मानक संतोषजनक पाए गए हैं, जिससे उम्मीद है कि जल्द ही हाइड्रोजन ट्रेन को नियमित संचालन के लिए ट्रैक पर उतारा जाएगा।

अगले चरण के परीक्षण

ट्रायल के अगले चरण में ट्रेन को सोनीपत तक चलाया जाएगा। अगले तीन से चार दिनों तक अलग-अलग समय पर परीक्षण जारी रहेगा। इस दौरान ट्रेन की अधिकतम रफ्तार, ईंधन खपत, सिग्नल सिस्टम और आपातकालीन स्थितियों में प्रतिक्रिया की जांच की जाएगी।

हाइड्रोजन ट्रेन की तकनीक

हाइड्रोजन ट्रेन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है। यह डीजल या ओवरहेड वायर के बिना बिजली से चलती है। इस तकनीक के जरिए यह ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल समाधान प्रस्तुत करती है। भारत में यह पहली हाइड्रोजन ट्रेन है, और इसका ट्रायल इसी क्रांतिकारी तकनीक पर किया गया।