हिसार। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के 20 दिन पूरे हो चुके हैं और इसका असर हरियाणा के उद्योगों पर गंभीर रूप से दिखाई दे रहा है। आयात-निर्यात प्रभावित होने के कारण केमिकल, प्लास्टिक और अन्य कच्चे माल के दाम तेजी से बढ़ गए हैं।
एलपीजी और पीएनजी संकट
एलपीजी आधारित उद्योगों को पिछले 15 दिनों से कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं, जिससे लगभग 430 उद्योग बंद हो गए हैं। पीएनजी पर निर्भर उद्योगों में भी आपूर्ति लगभग 40 प्रतिशत तक कम हो गई है। रोहतक, बहादुरगढ़, अंबाला, भिवानी, करनाल, पानीपत, कैथल और जींद के उद्योग इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हैं।
24 घंटे चलने वाले बड़े उद्योग अब मुश्किल से आठ घंटे काम कर रहे हैं, जिससे लाखों श्रमिक बेरोजगार हो गए हैं और कई अपने गृह प्रदेश लौटने लगे हैं।
पानीपत में टेक्सटाइल उद्योग संकट में
पानीपत की 300 टेक्सटाइल फैक्ट्रियों में काम बंद है। ऑर्डर रद्द होने लगे हैं और 35 हजार से अधिक श्रमिक बेरोजगार हो गए हैं। कंबल, शाल, बेडशीट, धागा और रंगाई के कार्य प्रभावित हैं।
उद्योगपति विनोद धमीजा ने बताया कि हर इकाई को रोजाना केवल 650 यूनिट पीएनजी मिल रही है। डायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नितिन अरोड़ा ने कहा कि पेट्रोलियम केमिकल महंगा हो गया है और कपड़ों के रंग में लगभग 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है।
कृषि और सड़क निर्माण उद्योग भी संकट में
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युद्ध प्रभावित देशों में चावल का निर्यात बंद होने से किराया बढ़ गया है।
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बिटूमिन तारकोल के दाम 46-50 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 70 रुपये तक पहुंच गए हैं। 180 किलोग्राम का ड्रम 4320 रुपये महंगा होकर 12,600 रुपये हो गया है। ठेकेदार सड़क निर्माण रोकने पर मजबूर हैं।
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करनाल के कृषि उपकरण उद्योगों में कमर्शियल गैस सप्लाई बंद होने से लगभग 120 फैक्ट्रियां प्रभावित हैं।
यमुनानगर और रोहतक के उद्योग भी प्रभावित
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यमुनानगर में तांबा, पीतल और एल्युमिनियम के बर्तन उद्योग तथा प्लाई इंडस्ट्री संकट में हैं।
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रोहतक की स्टील नट-बोल्ट फैक्ट्रियों में से 60 यूनिट प्रभावित हैं। एक हिट फोर्जिंग फैक्ट्री पूरी तरह बंद हो चुकी है।
उत्पादन क्षमता और श्रमिक पलायन
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हिसार में लगभग 30 प्रतिशत कच्चा माल नहीं मिल रहा। 7,000 उद्योगों में से 800 से अधिक प्रभावित हैं।
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लघु उद्योगों की उत्पादन क्षमता 25 प्रतिशत कम हो गई है।
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अंबाला में 2,500 उद्योग प्रभावित हैं, उत्पादन लागत 20 प्रतिशत बढ़ गई और लगभग 30 प्रतिशत श्रमिक अपने गृह प्रदेश लौट रहे हैं।
प्रभावित जिलों और उद्योगों का विवरण
| जिला | प्रभावित उद्योगों की संख्या |
|---|---|
| पानीपत | 300 |
| रोहतक | 60 |
| हिसार | 800 |
| भिवानी | 150 |
| करनाल | 120 |
| अंबाला | 2,500 |
| यमुनानगर | 2,000 |
भिवानी के प्लास्टिक उद्योगों में कच्चा माल नहीं मिलने से कामकाज प्रभावित है और सिलेंडर न मिलने से कामगारों की रोज़ी-रोटी पर संकट है।