चंडीगढ़ में हरियाणा सरकार ने केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत मंडियों में फसल खरीद व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़े सुधार लागू किए हैं। इन नए प्रावधानों के बाद मंडियों में फर्जीवाड़े और बाहरी राज्यों से अवैध रूप से आने वाली फसलों की बिक्री पर काफी हद तक रोक लगने का दावा किया जा रहा है।

फर्जी बिक्री पर लगी लगाम

नई व्यवस्था के तहत अब हरियाणा की मंडियों में केवल राज्य के वास्तविक किसानों की फसलों की खरीद हो रही है। इससे पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और उत्तराखंड जैसे पड़ोसी राज्यों से अवैध रूप से आने वाली उपज की बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण हुआ है।

राज्य सरकार का कहना है कि खरीद प्रक्रिया में किए गए तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों के कारण फर्जी नामों पर होने वाली गड़बड़ियों में कमी आई है।

गेहूं खरीद के आंकड़े

मंडियों में अब तक 39.65 लाख टन गेहूं की आवक दर्ज की गई है। इसमें से 2.44 लाख किसानों की 30.90 लाख टन फसल का बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा किया जा चुका है, जबकि लगभग 10.92 लाख टन गेहूं की खरीद पूरी हो चुकी है।

मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि नई व्यवस्था का उद्देश्य वास्तविक किसानों को उनका पूरा अधिकार दिलाना है और किसी भी तरह की फर्जी खरीद-बिक्री को रोकना है। उन्होंने बताया कि सरकार किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए तकनीक आधारित प्रणाली को लगातार मजबूत कर रही है।

नई खरीद प्रणाली में क्या-क्या बदलाव

सरकार ने खरीद प्रक्रिया में कई तकनीकी सुधार लागू किए हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • किसानों का आधार और बायोमेट्रिक सत्यापन
  • वाहनों का रजिस्ट्रेशन और फोटो रिकॉर्ड
  • मंडियों और गोदामों की जियो-फेंसिंग
  • सभी प्रवेश और निकासी गेट पर सीसीटीवी निगरानी
  • फसल परिवहन की जीपीएस ट्रैकिंग

इन उपायों का उद्देश्य खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और किसी भी तरह की अनियमितता को रोकना है।

वाहन सत्यापन और गेट पास व्यवस्था

मंडियों में अब गेट पास जारी करते समय वाहन नंबर और फोटो दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि वाहन पर नंबर स्पष्ट नहीं है तो किसान अस्थायी रूप से हाथ से लिखा नंबर भी उपयोग कर सकते हैं। इससे फसल की वास्तविक आवक की पहचान सुनिश्चित की जा सकेगी।

बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य

फसल बिक्री के लिए किसान स्वयं या उनके नामित प्रतिनिधियों में से किसी एक का बायोमेट्रिक सत्यापन जरूरी किया गया है। पहचान सुनिश्चित करने के लिए आईरिस स्कैन जैसी वैकल्पिक तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है।

इसके लिए मंडियों में पर्याप्त संख्या में बायोमेट्रिक उपकरण और तकनीकी स्टाफ की तैनाती की गई है।

निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया

मंडियों और गोदामों को जियो-फेंसिंग के दायरे में लाकर किसी भी अनधिकृत गेट पास को रोकने की व्यवस्था की गई है। साथ ही, फसल के परिवहन और भंडारण पर GPS आधारित निगरानी भी की जा रही है।

सरकार का दावा है कि इन सभी सुधारों से खरीद प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और किसान हितैषी बनी है तथा भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों पर प्रभावी रोक लगी है।