यूपी के गाजियाबाद में कोरियन संस्कृति के प्रति गहरी रुचि और पारिवारिक विरोध के बीच तीन किशोरियों के सुसाइड के बाद हरियाणा के कैथल से एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक किशोर ने ऑनलाइन गेम के टास्क को पूरा करने के लिए अपने ही पिता की गर्दन पर चाकू रख दिया। सौभाग्य से, पिता की नींद खुल गई और गंभीर हादसा टल गया।
नागरिक अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग के मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन ऑफिसर, डॉ. विनय गुप्ता ने बताया कि करनाल के बल्ला गांव से एक किशोर को इलाज के लिए लाया गया था। वह ऐसे ऑनलाइन गेम का आदी था, जिसमें अगले लेवल पर पहुंचने के लिए हिंसक टास्क दिए जाते थे। गेम में उसे आदेश मिला था कि रात के समय अपने पिता की गर्दन पर चाकू रखना है।
काउंसलिंग के दौरान यह भी पता चला कि बच्चे के माता-पिता के बीच घरेलू विवाद और हिंसा होती थी, जिसने बच्चे की मानसिक स्थिति पर नकारात्मक असर डाला। लगातार काउंसलिंग के बाद बच्चे के व्यवहार में कुछ सुधार देखा गया।
डोपामाइन और गेमिंग का असर
डोपामाइन वह न्यूरोट्रांसमीटर है जिसे 'फील-गुड' या आनंद हार्मोन भी कहा जाता है। यह प्रेरणा, खुशी, ध्यान, स्मृति और शारीरिक गतिविधियों को नियंत्रित करता है। डॉ. विनय गुप्ता ने बताया कि जिले में ऐसे और भी मामले सामने आए हैं, जिनमें बच्चे हथियार खरीदने या अपने गेम कैरेक्टर को अपग्रेड करने के लिए घर में चोरी जैसी घटनाएँ कर रहे थे।
काउंसलर्स के अनुसार, गेम के दौरान मिलने वाले वर्चुअल रिवार्ड्स बच्चों के दिमाग में डोपामाइन का स्तर बढ़ा देते हैं, जिससे उन्हें सही और गलत का फर्क समझ में नहीं आता। यदि समय रहते हस्तक्षेप न किया गया तो बच्चे गंभीर अपराध या आत्मघाती कदम भी उठा सकते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी
नागरिक अस्पताल में पिछले एक साल से स्थायी मनोचिकित्सक तैनात नहीं है। वर्तमान में उपचार पूरी तरह काउंसलर्स के भरोसे चल रहा है। गंभीर मानसिक समस्याओं वाले मरीजों को दवाइयों या विशेष इलाज के लिए रोहतक पीजीआई या अन्य बड़े चिकित्सा केंद्रों में रेफर किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग की यह कमी उन परिवारों पर भारी पड़ रही है, जो निजी इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ हैं।