हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार रात भूकंप के लगातार झटकों ने लोगों की नींद उड़ा दी। रात करीब 10:04 बजे आए 5.0 तीव्रता के तेज झटके के बाद भी धरती शांत नहीं हुई और रातभर दो बार और भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। इसके बाद 11:04 बजे 2.8 और 11:52 बजे 3.0 तीव्रता के झटकों ने लोगों में दहशत और बढ़ा दी। तीनों झटकों का केंद्र चंबा जिला बताया जा रहा है।

तेज झटके के बाद कई इलाकों में लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए और पूरी रात दहशत में गुजारी। भूकंप का असर हिमाचल के कई जिलों में महसूस किया गया, जबकि पड़ोसी राज्य पंजाब के कुछ हिस्सों में भी कंपन दर्ज किया गया।

कांगड़ा जिले के धर्मशाला में भूकंप के चलते कई घरों में दरारें आने की सूचना है। वहीं पालमपुर के सिविल अस्पताल में पुराने भवन की दूसरी मंजिल की छत को नुकसान पहुंचा। गनीमत रही कि इस घटना में कोई मरीज या स्टाफ सदस्य घायल नहीं हुआ, हालांकि अस्पताल में मौजूद लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बताया जा रहा है कि यह भवन पहले से ही असुरक्षित घोषित है, इसके बावजूद यहां मरीजों का उपचार जारी है।

शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के माहड़ गांव में एक स्लेटपोश मकान को भी नुकसान पहुंचा है। मकान की छत क्षतिग्रस्त हो गई है और अब रहने लायक नहीं बचा है। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मदद और राहत की मांग की है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कम गहराई पर आए भूकंप के कारण इसका असर ज्यादा क्षेत्रों में महसूस किया गया। 5.0 तीव्रता का यह झटका पिछले कई वर्षों की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक शक्तिशाली माना जा रहा है, जबकि सामान्य तौर पर प्रदेश में दो से चार तीव्रता के भूकंप ही दर्ज किए जाते रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश का इतिहास भी बड़े भूकंपों से जुड़ा रहा है। वर्ष 1905 में कांगड़ा में आए विनाशकारी भूकंप में भारी तबाही हुई थी, जिसमें हजारों लोगों की जान गई थी और व्यापक स्तर पर नुकसान हुआ था।