जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने कहा है कि बीते महीनों में पहलगाम आतंकी घटना और प्रतिकूल मौसम से प्रभावित हुआ पर्यटन क्षेत्र अब धीरे-धीरे उबर रहा है। हालात सामान्य होने के साथ घाटी में पर्यटकों की आवाजाही दोबारा बढ़ने लगी है, जिससे पर्यटन उद्योग को नई उम्मीद मिली है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 के दौरान आतंकी घटना के साथ-साथ भारी बारिश और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं ने पर्यटन को गहरा झटका दिया था। हालांकि, अब मौसम में सुधार के बाद पर्यटन गतिविधियां फिर से गति पकड़ रही हैं। बढ़ती पर्यटक संख्या को देखते हुए सरकार अपनी पर्यटन नीति और प्रबंधन प्रणाली की समीक्षा कर रही है।
मुख्य सचिव ने कहा कि लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर बढ़ते दबाव को संतुलित करने के लिए नए और वैकल्पिक पर्यटन केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। इसके लिए परिवहन सुविधाओं, सुरक्षा इंतजामों और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर काम चल रहा है। सुरक्षा ऑडिट पूरा होने के बाद कई स्थानों को दोबारा खोला गया है और आने वाले दिनों में अन्य क्षेत्रों को भी पर्यटकों के लिए खोलने की योजना है।
उन्होंने ‘स्प्रेड परियोजना’ का उल्लेख करते हुए बताया कि इसका उद्देश्य भीड़भाड़ वाले स्थलों से पर्यटकों को हटाकर पर्यावरण-अनुकूल और सालभर सक्रिय रहने वाले पर्यटन केंद्रों को बढ़ावा देना है। इस परियोजना के तहत आधारभूत सुविधाओं के विकास, कचरा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सृजन पर विशेष फोकस रहेगा।
जम्मू क्षेत्र में बढ़ रही तीर्थयात्रा को लंबे समय तक ठहरने वाले पर्यटन में बदलने के लिए भी रणनीति तैयार की जा रही है, ताकि श्रद्धालु धार्मिक स्थलों के साथ-साथ सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों का भी भ्रमण कर सकें।
अटल डुल्लू ने डिजिटल माध्यमों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिये देश-विदेश के पर्यटकों तक प्रभावी ढंग से पहुंच बनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग, बंजी जंपिंग और वॉटर स्पोर्ट्स जैसी साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर जम्मू-कश्मीर को एक बहुआयामी पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित किया जा सकता है।