झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। राज्य की दो सीटों पर चुनाव होने वाले हैं और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की योजना बना ली है। राज्य में मौजूद महागठबंधन में कांग्रेस और राजद शामिल हैं, फिर भी झामुमो स्वतंत्र रणनीति के तहत दोनों सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
पिछली बार भी झामुमो ने दिया था झटका
पिछले चुनाव में भी गठबंधन के बावजूद झामुमो ने कांग्रेस को नजरअंदाज करते हुए अपने उम्मीदवार उतारे थे। इस बार भी स्थिति लगभग वैसी ही बनती दिख रही है।
परिवार से हो सकते हैं उम्मीदवार
राजनीतिक चर्चाओं में यह बात उभरकर सामने आई है कि झामुमो एक सीट पर पार्टी सुप्रीमो शिबू सोरेन की बेटी अंजनी सोरेन को उम्मीदवार बना सकती है। वहीं दूसरी सीट पर पूर्व मंत्री दुर्गा सोरेन की पत्नी और वर्तमान में भाजपा से जुड़ी सीता सोरेन को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। हाल ही में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पैतृक गांव नेमरा में हुए बाहा पर्व के दौरान सीता सोरेन अपनी बेटियों के साथ पूरे सोरेन परिवार के साथ नजर आईं, जिससे राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं।
राज्यसभा चुनाव मई–जून में संभावित
राज्यसभा चुनाव संभावित रूप से मई–जून में आयोजित होंगे, लेकिन राजनीतिक दलों के बीच पहले से ही खींचतान शुरू हो गई है। झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने एक सीट पर कांग्रेस का दावा जताया है। झामुमो ने साफ कहा कि पार्टी मजबूत होगी तो महागठबंधन भी मजबूत रहेगा।
इरफान अंसारी ने मांगी सीट
इस बीच स्वास्थ्य मंत्री और कांग्रेस नेता इरफान अंसारी ने अपने पिता और वरिष्ठ कांग्रेस नेता फुरकान अंसारी के लिए राज्यसभा की मांग उठाई। उनका कहना है कि पार्टी को फुरकान अंसारी के योगदान का सम्मान करना चाहिए।
शिबू सोरेन के निधन से खाली हुई सीट
शिबू सोरेन के निधन के बाद राज्यसभा की एक सीट खाली हो गई है। वहीं भाजपा के सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है। दोनों सीटों को लेकर झामुमो और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनातनी बढ़ती दिख रही है।
भाजपा की रणनीति
भाजपा फिलहाल अपने दम पर एक सीट जीतने के लिए आवश्यक संख्या बल नहीं जुटा पा रही है। पार्टी अब इंडिया गठबंधन के कुछ विधायकों को साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। झारखंड में पहले भी राज्यसभा चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप लगते रहे हैं, इसलिए इस बार भी सभी की निगाहें राजनीतिक समीकरणों पर टिकी हुई हैं।