रांची। जमशेदपुर में करणी सेना के युवा नेता हिमांशु सिंह की हत्या के बाद झारखंड की राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। भाजपा नेताओं का आरोप है कि प्रदेश में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि पुलिस की मौजूदगी में भी वारदातों को अंजाम दिया जा रहा है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने प्रेस वार्ता में कहा कि जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित डबल डाउन बार के बाहर हुई यह घटना राज्य की सुरक्षा व्यवस्था की विफलता को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि जब पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे, तब भी अपराधी एक युवक पर जानलेवा हमला करने में सफल रहे। ऐसे में संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

साहू ने आरोप लगाया कि राज्य में अपराध नियंत्रण की बजाय प्रशासन अन्य कार्यों में व्यस्त नजर आता है, जबकि आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को लेकर 3 जुलाई को जमशेदपुर बंद का आयोजन करेगी और व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेगी।

बाबूलाल मरांडी ने भी जताई चिंता

झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पुलिस की मौजूदगी में इस तरह की हत्या बेहद चिंताजनक है और इससे कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।

मरांडी ने यह भी कहा कि पिछले वर्ष करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष विनय सिंह की हत्या के बाद अब हिमांशु सिंह की मौत ने लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।

अस्पताल में तोड़ा दम

जानकारी के अनुसार, हमले में गंभीर रूप से घायल हिमांशु सिंह को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया था, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें हमले के दौरान पुलिस वाहन आसपास दिखाई दे रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया है।

सरकार ने किए प्रशासनिक बदलाव

घटना के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूर्वी सिंहभूम के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) और सरायकेला-खरसावां के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को उनके पदों से हटाकर पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। मामले की निगरानी के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जमशेदपुर में डेरा डाले हुए हैं और जांच को तेज कर दिया गया है।

इस घटना के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। भाजपा जहां इसे राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था का उदाहरण बता रही है, वहीं प्रशासन दोषियों की गिरफ्तारी और मामले के खुलासे के लिए कार्रवाई में जुटा हुआ है।