रांची। झारखंड में हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर राजनीतिक हलचल थमती नजर नहीं आ रही है। कांग्रेस उम्मीदवार को अपेक्षा से कम वोट मिलने के बाद पार्टी के अंदर ही क्रॉस वोटिंग को लेकर शक और जांच का दौर तेज हो गया है।
शुरुआत में चर्चा थी कि सहयोगी दलों—राजद के कुछ और वामपंथी दलों के दो विधायकों ने कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान नहीं किया। यह आरोप कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू की ओर से भी सार्वजनिक रूप से लगाया गया था, जिसके बाद कार्रवाई की मांग उठी थी। हालांकि अब इस मामले में तस्वीर बदलती नजर आ रही है।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, भाकपा (माले) के विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था। इसके उलट अब कांग्रेस के ही कुछ विधायकों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि इस संबंध में तैयार रिपोर्ट पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व तक भी पहुंच चुकी है।
नई चर्चा के मुताबिक, अब माले विधायकों को संदेह के दायरे से बाहर माना जा रहा है, जबकि जांच की दिशा कांग्रेस के अपने विधायकों की ओर मुड़ गई है। हालांकि अभी तक किसी का नाम सार्वजनिक तौर पर नहीं लिया गया है। शुरुआती चरण में पार्टी के दो आदिवासी विधायकों पर संदेह जताए जाने की भी चर्चा है, लेकिन इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
इस घटनाक्रम से प्रदेश कांग्रेस के भीतर असहजता की स्थिति बनी हुई है। वहीं जिन विधायकों के नाम चर्चा में आ रहे हैं, वे इस तरह के संदेह से नाराज बताए जा रहे हैं।
दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर अब तक सत्तारूढ़ गठबंधन स्तर पर या अलग-अलग दलों की ओर से कोई औपचारिक समीक्षा नहीं की गई है। राज्यसभा चुनाव के परिणाम को 12 दिन बीत चुके हैं, लेकिन न तो गठबंधन की बैठक हुई है और न ही किसी स्तर पर विस्तृत समीक्षा प्रक्रिया शुरू की गई है।
कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा की हार के बाद शुरू में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जरूर चला, लेकिन बाद में सभी घटक दलों ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली। राजद की ओर से जवाबी बयान के बाद कांग्रेस नेतृत्व भी इस मामले में अपेक्षाकृत शांत हो गया है। झामुमो ने जरूर गठबंधन के भीतर समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया था, लेकिन अब तक उस दिशा में कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है।