ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का धरना शनिवार को लगातार सातवें दिन जारी रहा। मौनी अमावस्या पर पालकी से संगम में स्नान करने से रोकने के बाद वे त्रिवेणी मार्ग पर अपने शिविर के सामने फुटपाथ पर बैठ गए हैं। शंकराचार्य अधिकारियों से सार्वजनिक माफी की मांग पर अड़े हुए हैं। उनका आरोप है कि उन्हें संगम स्नान से रोका गया और उनके साथ आए साधु-संतों तथा सेवादारों के साथ पुलिस ने बेरहमी दिखाई।
साधु-संतों और सेवादारों को बाल पकड़कर खींचा गया और उन्हें मारपीट का सामना करना पड़ा। इसके बाद पालकी सहित उन्हें जबरन हटाया गया। शंकराचार्य के अनुसार, यदि वे स्वयं नीचे उतर जाते तो किसी अप्रिय घटना की संभावना रहती।
राजनीतिक और धार्मिक संगठनों का समर्थन
धरना स्थल पर लगातार राजनीतिक और धार्मिक संगठनों के लोग शंकराचार्य से मिलने आ रहे हैं। कांग्रेस, सपा और आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधियों के अलावा किसान यूनियनों ने भी समर्थन जताया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शंकराचार्य से फोन पर बात कर घटना पर दुख व्यक्त किया। वहीं, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह भी मिलने पहुंचे। यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने शंकराचार्य से अपील की कि अनशन समाप्त कर संगम में स्नान करें।
भक्तों ने लगवाए सीसीटीवी कैमरे
शंकराचार्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भक्तों ने शिविर के आसपास सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। उनके राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने बताया कि रात में कई संदिग्ध व्यक्तियों को शिविर के पास देखा गया। सुरक्षा के मद्देनज़र भक्तों ने 10 कैमरे लगाए हैं और रात में रेकी भी कराई जा रही है।
योगीराज ने कहा कि कैमरों के जरिए आने-जाने वालों पर निगरानी रखी जा रही है। सादी पोशाक में कई खुफिया और केंद्रीय एजेंसियों के लोग भी निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रशासन या कोई तीसरा पक्ष अचानक कार्रवाई कर सकता है, इसलिए किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए यह सुरक्षा उपाय किए गए हैं।