महाराष्ट्र में 15 जनवरी को मुंबई समेत 29 नगर निगमों के लिए मतदान होना है। इसको लेकर चुनाव प्रचार जोर-शोर से जारी है। इस बीच, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने नांदेड़ में एक रैली को संबोधित करते हुए भाजपा और उसके सहयोगी दलों पर मुस्लिम धार्मिक संस्थानों को कमजोर करने का आरोप लगाया।

वक्फ बोर्ड को लेकर ओवैसी का आरोप
ओवैसी ने कहा कि हाल ही में पारित वक्फ अधिनियम का इस्तेमाल मस्जिदों को बंद करने और सदियों पुरानी दरगाहों के स्वामित्व को चुनौती देने के लिए किया जा रहा है। उनका दावा है कि सरकार का उद्देश्य इन धार्मिक स्थलों का नियंत्रण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को सौंपना है।

उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे 15 जनवरी को नांदेड़-वाघाला नगर निगम चुनाव में भाजपा, एनसीपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना को खारिज करें। ओवैसी ने जोर देकर कहा कि मुसलमान भारत के पूर्ण नागरिक हैं और वे द्वितीय श्रेणी के नहीं हैं।

37 उम्मीदवारों के साथ मैदान में एआईएमआईएम
एआईएमआईएम ने नांदेड़ नगर निगम की 81 सीटों में से 37 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। ओवैसी ने कहा कि लोगों को इन पार्टियों के खिलाफ मतदान करना चाहिए ताकि वक्फ बोर्ड को कमजोर करने की कोशिश करने वालों को कड़ा संदेश मिले। उन्होंने कहा, “सरकार वक्फ अधिनियम के माध्यम से मस्जिदें बंद करना चाहती है और यह दिखाना चाहती है कि 100 साल से अधिक पुरानी दरगाहें वक्फ के स्वामित्व में नहीं हैं, बल्कि एएसआई के तहत हैं। यह चुनाव उसी अधिनियम के लागू होने के बाद हो रहा है। जनता को शिंदे, पवार और प्रधानमंत्री मोदी को यह स्पष्ट संदेश देना होगा कि हम इस कानून को स्वीकार नहीं करते।”

ओवैसी ने मतदाताओं से कहा कि वे मस्जिदों, दरगाहों और कब्रिस्तानों के खिलाफ बनाए गए इस कानून के विरुद्ध मतदान करें। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची में अपने नाम बनाए रखने के लिए सभी से मतदान करने का आग्रह भी किया।

धार्मिक स्वतंत्रता और राजनीतिक जुड़ाव
ओवैसी ने अपने बयान में कहा कि वे धार्मिक स्थलों को राजनीति में शामिल इसलिए करते हैं क्योंकि उनका संबंध संविधान द्वारा दिए गए विचार, अभिव्यक्ति और आस्था की स्वतंत्रता से है।

अजित पवार और अन्य नेताओं पर निशाना
ओवैसी ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार पर भी हमला किया, उनका कहना था कि अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार से अलग होकर पद का लाभ उठाया। उन्होंने कहा कि यदि कोई मुसलमान ऐसा करता तो उसे 75 साल की सजा हो सकती थी। इसके अलावा, ओवैसी ने भाजपा सांसद अशोक चव्हाण पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें केंद्रीय मंत्री नहीं बनाया गया, जबकि कम से कम राज्य मंत्री का पद मिलना चाहिए था।