जालंधर में घरों और कृषि मोटरों को नियमित बिजली आपूर्ति न मिलने के विरोध में मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) ने शक्ति सदन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। धरने की अगुवाई संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश चंद्र शर्मा ने की। इस दौरान किसानों ने बिजली कटौती को लेकर सरकार और विभागीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।
प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना था कि लगातार हो रही बिजली कटौती से खेतों की सिंचाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है, जिससे धान समेत अन्य फसलों पर संकट मंडरा रहा है। वहीं, भीषण गर्मी के बीच आम जनता को भी घंटों बिजली न मिलने से भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों को निर्बाध बिजली देने का दावा करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति बिल्कुल अलग है। ग्रामीण इलाकों में जहां कृषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं, वहीं शहरों में भी अघोषित कटौती ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) पूरे पंजाब में बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेगी और संघर्ष को और तेज किया जाएगा। इस दौरान किसानों ने बिजली विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा।
बिजली विभाग का पक्ष
उधर, बिजली विभाग के नॉर्थ रीजन के चीफ इंजीनियर सरबजीत सिंह ने कहा कि राज्य में बढ़ी हुई मांग के कारण सप्लाई पर दबाव बढ़ा है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय पूल से 300 से 400 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की खरीद की जा रही है, लेकिन तापमान बढ़ने से लोड रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
उन्होंने बताया कि किसानों की फसलों को ध्यान में रखते हुए कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता पर बिजली दी जा रही है, जिसके चलते कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में रात 10 बजे से सुबह 8 बजे तक कट लगाए जा रहे हैं। विभाग का दावा है कि किसानों को औसतन 8 घंटे या उससे अधिक बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि मांग के मुकाबले सप्लाई में अंतर होने के कारण कुछ क्षेत्रों में कटौती करनी पड़ रही है, लेकिन स्थिति को संतुलित करने के प्रयास लगातार जारी हैं।