नई दिल्ली। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्काल रिहाई से इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अभी सजा पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं बनता। अदालत ने कहा कि यदि भविष्य में स्वास्थ्य स्थिति अत्यंत गंभीर होती है या जीवन को वास्तविक खतरा होता है, तभी जमानत पर विचार किया जाएगा।

जेल प्रशासन को मेडिकल सुविधा देने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया है कि आसाराम को आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही राजस्थान सरकार से इस मामले में विस्तृत जवाब दो सप्ताह के भीतर दाखिल करने को कहा गया है।

आसाराम की दलीलें क्या थीं?

सुनवाई के दौरान आसाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने दलील दी कि वह 80 वर्ष से अधिक आयु के हैं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। हालांकि अदालत ने कहा कि केवल उम्र या बीमारी के आधार पर फिलहाल जमानत देना उचित नहीं होगा।

हाईकोर्ट के फैसले पर भी चर्चा

राजस्थान हाईकोर्ट ने 27 मई को आसाराम की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था। हालांकि, कुछ गंभीर धाराओं जैसे सामूहिक दुष्कर्म और पॉक्सो के कुछ प्रावधानों से उन्हें राहत दी गई थी। इसके बावजूद नाबालिग से दुष्कर्म से जुड़े प्रमुख आरोपों में उनकी सजा कायम रखी गई थी।

मामला 2013 का है

यह पूरा मामला वर्ष 2013 का है, जब एक नाबालिग छात्रा ने आसाराम पर अपने आश्रम में दुष्कर्म का आरोप लगाया था। ट्रायल कोर्ट ने 25 अप्रैल 2018 को उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद हाईकोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट में यह मामला विचाराधीन है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को कोई अंतरिम राहत नहीं दी है और मामला आगे की सुनवाई के लिए लंबित है।