आम आदमी पार्टी में राजनीतिक हलचल के बीच राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल ने रविवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि पार्टी छोड़ने वाले कुछ सांसदों ने उन्हें भी साथ आने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे स्पष्ट रूप से ठुकरा दिया।

सीचेवाल के अनुसार, राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने उन्हें फोन कर ‘आजाद समूह’ में शामिल होने का ऑफर दिया था, जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि सात सांसदों का एक साथ पार्टी छोड़ना बेहद दुखद है और यह आम आदमी पार्टी के प्रति वफादारी पर सवाल खड़ा करता है।

उन्होंने कहा कि जिन नेताओं को पार्टी ने राज्यसभा में भेजकर पंजाब के मुद्दे उठाने की जिम्मेदारी दी थी, उन्होंने अचानक पार्टी छोड़ दी, जो सही नहीं है। सीचेवाल ने राघव चड्ढा और संदीप पाठक के फैसले पर भी हैरानी जताई और कहा कि इन नेताओं ने पार्टी के साथ लंबे समय तक काम किया और सत्ता का हिस्सा रहे, लेकिन अब अलग राह चुन ली।

इस बीच, आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने लगाए गए आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि उन्हें ‘गद्दार’ कहना गलत है और वे पंजाब के विकास के लिए पहले से अधिक काम करेंगे।

साहनी ने कहा कि 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान राघव चड्ढा और संदीप पाठक की अहम भूमिका थी, लेकिन बाद में उन्हें धीरे-धीरे साइडलाइन किया गया, जिससे असंतोष बढ़ा। उनके मुताबिक, पार्टी के भीतर बदलावों और नेतृत्व के फैसलों ने भी स्थिति को प्रभावित किया।

उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली चुनाव में हार के बाद संगठनात्मक बदलाव हुए, जिसके बाद कई नेताओं की भूमिका सीमित हो गई। साहनी ने दावा किया कि उन्होंने इस मुद्दे पर पार्टी नेतृत्व से भी बातचीत की थी, लेकिन समाधान नहीं निकल सका।

साहनी के अनुसार, इस्तीफे को लेकर भी विचार हुआ था, लेकिन बाद में उन्होंने अपने करीबियों से चर्चा के बाद अलग राजनीतिक रास्ता चुनने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि अब उनका फोकस पंजाब के विकास पर रहेगा और केंद्र सरकार भी राज्य के लिए काम करना चाहती है।

उन्होंने आगे कहा कि पंजाब की समस्याओं के समाधान के लिए बेहतर समन्वय जरूरी है और फ्रेट सब्सिडी जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार सहयोग के लिए तैयार है, बशर्ते सही प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाएं। 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला जनता ही करेगी।