सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की और दोनों प्रमुख सूचकांक हरे निशान में खुले। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 546.64 अंक की बढ़त के साथ 77,210.85 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 169.55 अंक चढ़कर 24,067.50 पर कारोबार करता नजर आया।
वहीं, विदेशी बाजारों और वैश्विक परिस्थितियों के बीच रुपये पर दबाव बना रहा। डॉलर की मजबूत मांग और सुरक्षित निवेश की ओर रुझान के चलते रुपया शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 11 पैसे कमजोर होकर 94.27 पर आ गया।
सेंसेक्स की कंपनियों का प्रदर्शन
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में सन फार्मा सबसे बड़ा गेनर रहा, जिसके शेयरों में 4% से अधिक की तेजी दर्ज की गई। कंपनी ने अमेरिकी फर्म ऑर्गानोन एंड कंपनी के अधिग्रहण की घोषणा की है, जो लगभग 11.75 अरब डॉलर के सौदे में पूरी तरह नकद होगा।
इसके अलावा अदानी पोर्ट्स, कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा स्टील और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में भी मजबूती देखी गई। दूसरी ओर एक्सिस बैंक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, बजाज फाइनेंस और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर दबाव में रहे।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख
एशियाई शेयर बाजारों में मिश्रित कारोबार देखने को मिला। अमेरिकी बाजारों में पिछले सप्ताह की मजबूती के बाद जापान का निक्केई 225 सूचकांक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक भी मजबूत बढ़त के साथ ऊपर बंद हुआ, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग मामूली गिरावट में रहा। शंघाई कंपोजिट और ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 इंडेक्स भी हल्की गिरावट में रहे। वहीं, ताइवान का ताइएक्स इंडेक्स तकनीकी शेयरों में खरीदारी के चलते मजबूती के साथ चढ़ा।
तेल बाजार और वैश्विक संकेत
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भी उछाल देखा गया। ब्रेंट क्रूड वायदा 1.16% की बढ़त के साथ 106.55 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
तेल बाजार पर भू-राजनीतिक तनाव और वार्ता में अनिश्चितता का असर देखने को मिला, जिससे कीमतों में तेजी आई।
निवेश प्रवाह और बाजार रुझान
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार बिकवाली कर रहे हैं। शुक्रवार को उन्होंने 8,827.87 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 4,700.71 करोड़ रुपये का निवेश किया, जिससे बाजार को कुछ सहारा मिला।
आगे क्या रहेगा फोकस में
इस सप्ताह दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंक—फेडरल रिजर्व, यूरोपीय सेंट्रल बैंक, बैंक ऑफ जापान और बैंक ऑफ इंग्लैंड—की ब्याज दरों पर होने वाली घोषणाएं बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।