मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधावर को नए जिलों के लिए एक कमेटी के गठन को मंजूरी दी जो नए जिलों की जरूरत का आंकलन करने के बाद 6 महीने बाद राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप देगी. कमेटी के अधय्क्ष रिटायर्ड IAS अधिकारी रामलुभाया बनाए गए हैं.
राजस्थान में लंबे समय से उठ रही नए जिले बनाने की मांग पर सरकार अब एक कदम और आगे बढ़ गई है. बुधवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नए जिलों के लिए एक कमेटी के गठन को मंजूरी दी जो कमेटी नए जिलों की जरूरत का आंकलन करने के बाद 6 महीने बाद राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप देगी. कमेटी में रिटायर्ड IAS अधिकारी और पूर्व राज्य मुख्य निर्वाचन आयुक्त रामलुभाया को नए जिलों के गठन के लिए बनी हाईपावर कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है.
वहीं अध्यक्ष के अलावा इस कमेटी में राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव सदस्य सचिव, ग्रामीण विकास व पंचायतीराज विभाग के प्रमुख सचिव, वित्त विभाग के स्पेशल सेक्रेटरी और गृह विभाग के संयुक्त सचिव भी सदस्य होंगे.
गहलोत के मुताबिक नए जिलों के लिए गठित समिति विधायकों, जनप्रतिनिधियों सहित आम लोगों से समय-समय पर आने वाले ज्ञापनों और मांग पत्रों पर भी विचार करेगी. बता दें कि हाल में पेश किए गए राज्य बजट के बाद बहस पर जवाब देते हुए सीएम गहलोत ने जिलों के गठन के लिए एक हाईपावर कमेटी बनाने का ऐलान किया था.
50 जगहों से नए जिले की उठी मांग
मालूम हो कि नए जिले बनाने की मांग साल बीतने के साथ ही विकराल रूप ले रही है. प्रदेश में फिलहाल 24 बड़े जिलों का बंटवारा कर 50 से ज्यादा जगहों से नए जिले बनाने की मांग तेजी से उठ रही है. वहीं कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के विधायक भी नए जिले बनाने की मांग लगातार कर रहे हैं. बालोतरा से आने वाले कांग्रेस विधायक ने हाल में विधानसभा में बजट सत्र के बाद जूते खोलकर विरोध भी जताया था.
वहीं दूसरी ओर नए जिले बनाने की मांग वोट बैंक भी जुड़ी है ऐसे में कांग्रेस के विधायक अपने क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए पैरवी कर रहे हैं. बता दें कि प्रदेश में अजमेर जिले से ब्यावर, बाड़मेर से बालोतरा, सीकर से नीमकाथाना, जोधपुर से फलौदी को जिला बनाने की मांग बहुत लंबे समय से हो रही है.