नई दिल्ली/अयोध्या। राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा और जमीन खरीद घोटाले की जांच के सिलसिले में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह गुरुवार को विशेष जांच समिति (SIT) प्रमुख विजय विश्वास पंत के समक्ष पेश हुए। इस दौरान उन्होंने अयोध्या में जमीनों की खरीद-फरोख्त में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के दस्तावेज और सबूत सौंपे।

मीडिया से बातचीत में संजय सिंह ने आरोप लगाया कि अयोध्या में जमीनों के सौदों में भारी घोटाला हुआ है। उन्होंने दावा किया कि कुछ जमीनें जो पहले करीब चार करोड़ रुपये में खरीदी गई थीं, उन्हें कुछ ही दिनों के भीतर लगभग आठ करोड़ रुपये में आगे बेचा गया। उनके अनुसार इस पूरे मामले में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका भी सामने आ रही है।

संजय सिंह ने कहा कि उन्होंने इस कथित घोटाले से जुड़े सभी दस्तावेज जांच समिति को सौंप दिए हैं और अब आगे की कार्रवाई का इंतजार है। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवान श्रीराम के नाम पर भी वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

इसी बीच एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट से ट्रस्ट के वित्तीय और प्रशासनिक ढांचे को लेकर कई अहम सवाल उठे हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रस्ट के गठन के कुछ ही महीनों बाद ही एक निजी ऑडिट फर्म ने दान प्रबंधन, आभूषणों के रिकॉर्ड, वित्तीय निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था में गंभीर खामियों की ओर इशारा किया था और सुधार की सिफारिश की थी।

सूत्रों के मुताबिक, ऑडिट रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि वित्तीय रिकॉर्ड रखने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की कमी है और जवाबदेही तय करने के लिए स्पष्ट प्रशासनिक व्यवस्था मौजूद नहीं थी। इसके बावजूद इन सुझावों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।

रिपोर्ट में यह चेतावनी भी दी गई थी कि बिना मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखना मुश्किल होगा। साथ ही लेन-देन, डेटा प्रबंधन, मानव संसाधन और रिकॉर्ड संधारण के लिए विस्तृत SOP लागू करने की सिफारिश की गई थी।

सबसे गंभीर चिंता दान और आभूषणों के रिकॉर्ड को लेकर जताई गई थी, जिसमें कहा गया था कि नकद और अन्य दान के लिए मजबूत स्टॉक रजिस्टर और निगरानी तंत्र की आवश्यकता है। इसके अलावा बैंक समन्वयन, डेटा सुरक्षा और आईटी नियंत्रण व्यवस्था को भी कमजोर बताया गया था।