अलीगढ़। साइबर अपराध की जांच में जिले की टीम ने एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह को पकड़कर देश में एक रिकॉर्ड काम किया है। हांगकांग से संचालित इस गिरोह ने व्हाट्सएप के लगभग 600 ग्रुपों के जरिए 1.5 लाख से अधिक लोगों को जोड़ रखा था और केवल छह फरवरी को 1,200 करोड़ रुपये की ठगी करने वाला था। पुलिस ने गिरोह के 12 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। अनुमानित कुल ठगी रकम 5,000 करोड़ रुपये से अधिक है।

गिरोह का modus operandi बेहद व्यवस्थित था। पहले सेवानिवृत्त अधिकारियों, बड़े व्यापारियों और उच्च धन वाले खाताधारकों को लालच में डालकर उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल किया जाता और फिर 200 गुना मुनाफे का झांसा देकर पैसे ऐंठे जाते थे। इसके बाद देश में किराए या खरीदे गए बैंक खातों के जरिए रकम का ट्रांसफर कर यूएसडीटी (USDT) में बदला जाता था।

एसपी देहात अमृत जैन ने बताया कि स्वर्ण जयंती नगर निवासी दिनेश शर्मा भी इस गिरोह के शिकार बने और उन्हें 1.10 करोड़ रुपये की ठगी झेलनी पड़ी। छह फरवरी को उनसे अतिरिक्त दो करोड़ रुपये की मांग की गई। दिनेश शर्मा की मदद से साइबर टीम ने सात प्रमुख खातों की पहचान की, जिनमें रकम ट्रांसफर हो रही थी। इसके आधार पर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में सात टीमों ने पांच दिन तक दबिश दी।

जांच में पता चला कि गिरोह में शामिल कई लोग अपने खातों में बड़ी रकम भेजने के बदले मोटी कमिशन राशि ले रहे थे। ओडिशा के जितेंद्र, छत्तीसगढ़ के दुर्गेश और मथुरा के आदित्य समेत 12 आरोपी गिरफ्तार किए गए। कुछ आरोपी भाजपा नेताओं से भी जुड़े बताए गए हैं।

इस कार्रवाई के दौरान 30 पासबुक, 28 एटीएम/डेबिट कार्ड, 2 क्रेडिट कार्ड, 23 मोबाइल फोन, 13 सिम, 9 फर्जी फर्म की मुहर, 2 जियो राउटर, 1 लैपटॉप, 1 कैमरा और पीड़ित से बरामद 5.64 लाख रुपये शामिल हैं।

एसएसपी नीरज जादौन ने बताया कि यह कार्रवाई साइबर सर्विलांस टीम की मदद से की गई। अब तक 12 आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है और अन्य दो दर्जन संदिग्धों की तलाश जारी है। इंटरपोल की मदद से हांगकांग स्थित मुख्य संचालकों तक भी कार्रवाई की योजना है।

नीरज जादौन ने टीम की सराहना करते हुए कहा, "यह बहुत ही महत्वपूर्ण खुलासा है। हमारी टीम ने जो कार्य किया है, उसके लिए पूरी टीम बधाई की पात्र है। गिरोह से जुड़े सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।"