आजमगढ़ में फर्जी मदरसों के नाम पर सरकारी अनुदान में कथित घोटाले के मामले में पुलिस ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। अतरौलिया थाना पुलिस ने सोमवार को मदरसा फैजेकौशर निस्वा, रूकुमलपुर में कार्यरत शिक्षिका रेनू यादव को गिरफ्तार कर लिया। आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

यह मामला लंबे समय से चल रही जांच का हिस्सा है, जिसमें आरोप है कि अस्तित्वहीन मदरसों के नाम पर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया गया। इस प्रकरण में राज्य विशेष अपराध अनुसंधान शाखा (EOW) की शिकायत पर वर्ष 2025 में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसके बाद कई स्तरों पर जांच आगे बढ़ाई गई।

जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि मदरसा फैजेकौशर निस्वा समेत कई संस्थानों में फर्जी रिकॉर्ड तैयार कर सरकार से अनुदान प्राप्त किया गया। आरोप है कि पोर्टल पर शिक्षकों और छात्रों की गलत संख्या दर्ज कर वित्तीय लाभ लिया गया। जिन स्थानों पर मदरसों के संचालन का दावा किया गया था, वहां जांच में कहीं दुकानें, कहीं अन्य संस्थान और कहीं खाली परिसर पाए गए।

इस केस में पहले भी कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। पुलिस के अनुसार पिछले एक सप्ताह में अलग-अलग मामलों में करीब सात लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। वहीं इस मामले में नामजद अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।

जांच एजेंसियों के मुताबिक जिले में करीब 207 फर्जी या संदिग्ध मदरसों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। इन पर आरोप है कि मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत मानदेय, छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी मदों में लाखों रुपये की अनियमितता की गई। अनुमान है कि कुल मिलाकर 60 लाख रुपये से अधिक की सरकारी धनराशि के दुरुपयोग का मामला सामने आया है।