रटौल (उत्तर प्रदेश): रटौल नगर पंचायत के चेयरमैन जुनैद फरीदी का नामांकन अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पवन कुमार राय ने रद्द कर दिया है। अदालत ने एक माह के भीतर उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 25-2 के तहत आगे की कार्रवाई करने के आदेश भी दिए हैं। इस धारा के अनुसार, चुनाव कराना अनिवार्य नहीं होता और उपविजेता प्रत्याशी को चेयरमैन पद पर नियुक्त किया जा सकता है। इस स्थिति में उपविजेता भाजपा के हाजी मुंतजिर को चेयरमैन बनाया जा सकता है।
हाजी मुंतजिर ने नगर पंचायत चुनाव के बाद न्यायालय में याचिका दायर की थी। उनका आरोप था कि मई 2023 में लख्मीचंद पटवारी कॉलेज, खेकड़ा में मतगणना के दौरान अनियमितताएँ हुईं। साथ ही उन्होंने जीतने वाले निर्दलीय प्रत्याशी जुनैद फरीदी पर नामांकन पत्र और शपथ पत्र में आपराधिक मामले, करोड़ों की संपत्ति, बैंक लोन, उम्र, शिक्षा और पत्नी के जेवर की गलत जानकारी छिपाने का आरोप लगाया था।
अदालत में मामले की सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश ने फरीदी के नामांकन और शपथ पत्र को शून्य घोषित किया।
नामांकन पत्र में छिपाए गए तथ्यों के आरोप:
याचिकाकर्ता मुंतजिर ने कहा कि फरीदी ने नामांकन पत्र में गाजियाबाद के मोदीनगर थाने में दर्ज धोखाधड़ी, खेकड़ा में पांच आपराधिक मामले, टॉवर से आय, जमीन और बैंक लोन की जानकारी छुपाई। ये छिपाई गई जानकारियाँ चुनाव को अवैध बनाने के लिए पर्याप्त हैं।
पक्षकार बनाए गए अन्य उम्मीदवार:
न्यायालय ने याचिका में फरीदी के साथ अन्य 17 प्रत्याशियों को पक्षकार बनाया। इनमें नसरीन, रजा हसन, साहिर, फजर मोहम्मद, किशवर, शहजाद, सोनू, साजिद, रहसु, कामिल, हकीकत अली, जाकिर हसन, मोहम्मद नक्की, शबाना, शकील अहमद और सुमन गौतम शामिल हैं। इसके अलावा एसडीएम खेकड़ा और डीएम को भी पक्षकार बनाया गया।
उपविजेता मुंतजिर को न्याय मिलने पर उत्सव:
फरीदी का नामांकन रद्द होने के बाद रटौल में मुंतजिर का लोगों ने फूलमालाओं से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि चुनाव में उन्हें साजिश के तहत हराया गया था, लेकिन अब न्यायालय ने न्याय प्रदान किया है।
फरीदी का हाईकोर्ट जाने का बयान:
जुनैद फरीदी ने कहा कि उनकी पत्नी बीमार थी और वह इस मामले पर ध्यान नहीं दे पाए। उनका कहना है कि उन्होंने नामांकन में कोई तथ्य छुपाया नहीं और वे इस फैसले के खिलाफ जल्द ही हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
बागपत के बाद रटौल में कार्रवाई:
इससे पहले बागपत नगर पालिका चेयरमैन राजुद्दीन एडवोकेट पर भी श्मशान घाट निर्माण में अनियमितताओं के कारण कार्रवाई हुई थी। बाद में हाईकोर्ट से उन्हें राहत मिली थी।