वृंदावन स्थित ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। वीकेंड और पर्व-त्योहारों के दौरान यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती है। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार मंदिर में दान अर्पित करते हैं, जो या तो दान पेटियों (गोलक) में डाला जाता है या फिर मंदिर परिसर में चढ़ावे के रूप में दिया जाता है।
हाल के दिनों में देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों, विशेषकर अयोध्या श्रीराम मंदिर में दान राशि से जुड़ी अनियमितताओं की घटनाओं के सामने आने के बाद ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर प्रबंधन ने पारदर्शिता को लेकर सख्त रुख अपनाया है। इसी के तहत अब श्रद्धालुओं को अधिक से अधिक ऑनलाइन दान के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
मंदिर प्रशासन ने दान पेटियों पर क्यूआर कोड लगवा दिए हैं, जिससे श्रद्धालु सीधे डिजिटल माध्यम से दान कर सकें। इसके अलावा भारतीय स्टेट बैंक की ओर से मंदिर कार्यालय में ऑनलाइन भुगतान के लिए मशीन भी स्थापित की गई है। प्रबंधन का कहना है कि डिजिटल दान व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना कम होगी।
दान व्यवस्था को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
मंदिर प्रशासन के अनुसार, पूर्व में दान से जुड़ी कुछ अनियमितताओं की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। लगभग चार वर्ष पहले भंडारी को चढ़ावे की राशि के साथ पकड़े जाने का मामला सामने आया था। वहीं पिछले वर्ष दान गिनती के दौरान एक बैंक कर्मचारी द्वारा लाखों रुपये की हेराफेरी का आरोप भी लगा था।
इन्हीं घटनाओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति ने मंदिरों में डिजिटल दान को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। समिति ने मंदिर परिसर में जगह-जगह क्यूआर कोड और ऑनलाइन दान से जुड़े जागरूकता पोस्टर लगाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सुरक्षा कर्मियों को भी श्रद्धालुओं को ऑनलाइन दान के लिए प्रेरित करने को कहा गया है।
दान पेटियों की व्यवस्था में बदलाव
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मंदिर की दान पेटियों की संरचना में भी बदलाव किया गया है। पहले कई स्थानों पर दान पेटियों के ऊपर वस्तुएं रखकर उन्हें आंशिक रूप से ढक दिया जाता था, जिससे दान प्रक्रिया पर सवाल उठते थे। अब नई व्यवस्था के तहत दान पेटियों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि उनमें छेड़छाड़ या अवरोध संभव न हो।
अन्य मंदिरों में भी डिजिटल व्यवस्था
राधावल्लभ मंदिर में श्रद्धालु दान देने के बाद रसीद प्राप्त करते हैं, जबकि ऑनलाइन भुगतान की सुविधा भी उपलब्ध है। वहीं राधारमण मंदिर में अधिकतर श्रद्धालु कार्यालय के माध्यम से दान करते हैं, हालांकि अब डिजिटल माध्यम से दान देने का चलन भी धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
मंदिर प्रबंधन का मानना है कि डिजिटल दान व्यवस्था से न केवल पारदर्शिता सुनिश्चित होगी, बल्कि श्रद्धालुओं का विश्वास भी और मजबूत होगा।