लखनऊ। उत्तर प्रदेश के हजारों छोटे गांव और कस्बे आज भी बुनियादी बैंकिंग सेवाओं से दूर हैं। इस स्थिति को गंभीरता से देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सभी बैंकों को निर्देश दिए हैं कि वे ऐसे क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाएं जल्द से जल्द उपलब्ध कराएं।
बैंकिंग-विहीन केंद्रों की स्थिति
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल 62,404 बैंकिंग-विहीन केंद्र चिह्नित किए गए थे, जिनमें से अधिकांश अब भी सेवाओं से वंचित हैं। इनमें 61,949 केंद्र टियर-6 श्रेणी के हैं, जहां आबादी 5,000 से कम है। इन इलाकों में पारंपरिक शाखाएं खोलना भौगोलिक और आर्थिक कारणों से चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
प्रयासों की समीक्षा और प्राथमिकता
बैंकों ने अब इन क्षेत्रों में माइक्रो लेवल सर्वे शुरू कर दिया है। प्राथमिकता उन गांव-कस्बों को दी जा रही है, जहां आबादी 4,000–5,000 के बीच है। पहले चरण में ऐसे 641 केंद्र चुने गए थे, जिनमें से 618 केंद्रों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंच चुकी हैं। शेष 23 केंद्र दुर्गम वन क्षेत्र या बाढ़ प्रभावित इलाके होने के कारण अब भी सेवाओं से दूर हैं।
आधुनिक माध्यमों से बैंकिंग सेवाएं
बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे पारंपरिक शाखाओं के बजाय बैंकिंग आउटलेट, बैंक मित्र और डिजिटल माध्यम से सेवाएं प्रदान करें। इससे लागत कम होगी और दूरदराज क्षेत्रों में पहुंच आसान होगी। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) इन प्रयासों की निरंतर समीक्षा कर रही है और प्रत्येक केंद्र की अपडेट रिपोर्ट आरबीआई को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। जिला स्तर पर भी समन्वय बढ़ाया गया है ताकि प्रशासनिक सहयोग से काम तेजी से हो सके।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
बैंकिंग सेवाओं के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। जनधन योजना, पेंशन, सब्सिडी और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाओं से इन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। इस अभियान की निगरानी के लिए उप-समिति बनाई गई है, जो नियमित बैठकें कर रही है। फरवरी में हुई बैठक में शेष केंद्रों पर तेजी से कार्यवाही के निर्देश दिए गए।