बरेली: शहर में 26 सितंबर 2025 को हुए उपद्रव के मामले में आइएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां और उनके साथी रिहान को कोर्ट से राहत नहीं मिली। विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए कोर्ट अमृता शुक्ला की अदालत ने दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
मौका-ए-वारदात पर एडीजीसी क्राइम महेश यादव ने बताया कि जुमे की नमाज के बाद इस्लामिया इंटर कालेज के मैदान में मौलाना तौकीर के आह्वान पर बड़ी भीड़ जमा हुई थी। इसके बाद शहर के विभिन्न हिस्सों में हिंसक बवाल हुआ। उपद्रवियों ने पुलिस टीम पर 10 अलग-अलग जगहों पर पथराव और फायरिंग की, जिसमें कई सिपाही घायल हुए।
कोतवाली बरेली में एसआई राजीव कुमार शर्मा की रिपोर्ट के अनुसार, कुमार टाकीज के पास भीड़ ने अवैध हथियारों से फायरिंग की और पुलिस बल पर हमला किया। पुलिस ने वीडियोग्राफी और जांच के आधार पर उपद्रवियों की पहचान कर मुकदमा दर्ज किया, जिसमें 450 अज्ञात लोगों को भी शामिल किया गया।
जांच के दौरान यह पाया गया कि यह केवल अचानक हुआ उपद्रव नहीं था, बल्कि इसके पीछे गहरी साजिश थी। इसी आधार पर मुकदमे में आपराधिक साजिश की धारा जोड़ी गई। धारा बढ़ने के बाद बचाव पक्ष ने पुनः जमानत के लिए अर्जी दी थी।
सुनवाई के दौरान एडीजीसी क्राइम महेश यादव ने जोरदार दलीलें पेश की और जमानत का विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि शहर की शांति व्यवस्था भंग करने में मौलाना तौकीर और रिहान की मुख्य भूमिका रही।
लंबी बहस और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद विशेष न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए मौलाना तौकीर रजा और रिहान की जमानत याचिकाएं निरस्त कर दीं।