लखनऊ। केंद्रीय बजट 2026-27 में पशुपालन क्षेत्र के लिए किए गए प्रावधान प्रदेश में पशुओं की सेहत और दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने में मदद करेंगे। अब मनुष्यों की तरह ही पशुओं की स्वास्थ्य जांच और समय पर गर्भाधान की प्रक्रिया सुनिश्चित करना संभव होगा।
प्रदेश में फिलहाल 2202 पशु चिकित्सालय और 267 पशु औषधालय हैं, लेकिन लगभग 30 प्रतिशत पद खाली हैं, क्योंकि प्रशिक्षित चिकित्सक और अन्य स्टाफ उपलब्ध नहीं हो पाते। इस चुनौती का समाधान करने के लिए केंद्र ने लोन-लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना की घोषणा की है। इसके तहत प्राइवेट वेटरनरी और पैरावेटरनरी कॉलेज, अस्पताल, डायग्नोस्टिक लैब और ब्रीडिंग फैसिलिटी स्थापित की जाएंगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में डॉक्टर और स्टाफ उपलब्ध होंगे, और पशुओं के गर्भाधान की प्रक्रिया समय पर पूरी की जा सकेगी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में किसानों, पशुपालकों और ग्रामीणों के लिए कई प्रमुख योजनाओं का उल्लेख किया:
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छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर।
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दिव्यांगों के सशक्तीकरण के लिए नए अवसर।
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मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का एकीकृत विकास।
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तटीय क्षेत्रों में फिशरीज वैल्यू चेन को मजबूत करना।
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स्टार्टअप और महिलाओं के नेतृत्व वाले समूहों को बाजार से जोड़ना।
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पशुपालन क्षेत्र में लोन-आधारित सब्सिडी कार्यक्रम।
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पशुधन उद्यमों का आधुनिकीकरण और संवर्धन।
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नारियल, चंदन और काजू जैसी तटीय फसलों के लिए विशेष सहायता योजनाएं।
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भारतीय काजू और कोको को वैश्विक ब्रांड के रूप में विकसित करने के कार्यक्रम।
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भारतीय चंदन लकड़ी की गुणवत्ता और गरिमा को बढ़ाने के लिए राज्य सरकारों से सहयोग।
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अखरोट और बादाम की पैदावार बढ़ाने के लिए विशेष परियोजनाएं।
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AI-India VISTAAR: बहुभाषी एआई टूल, जो किसानों को बेहतर निर्णय लेने में मदद करेगा और उनकी उत्पादकता बढ़ाएगा।
बजट के इन कदमों से न केवल पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय में भी वृद्धि होने की उम्मीद है।