पडरौना: जिले के परिषदीय स्कूलों में तैनात दिव्यांग शिक्षकों के दिव्यांग और शैक्षिक प्रमाण-पत्रों की सख्त जांच की जाएगी। इसका उद्देश्य फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी प्राप्त करने वाले शिक्षकों की पहचान करना है। बेसिक शिक्षा विभाग में हाल के समय में प्रमाण-पत्रों के फर्जी मामलों में वृद्धि के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है। जांच में अपात्र पाए जाने वाले या फर्जी प्रमाण-पत्र रखने वाले शिक्षकों की सेवा तत्काल समाप्त कर दी जाएगी।
डीजी स्कूल शिक्षा के पत्र के बाद बीएसए डॉ. रामजियावन मौर्य ने सभी बीईओ को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने ब्लॉक में तैनात दिव्यांग शिक्षकों की सूची तैयार करें और निर्धारित समयावधि के भीतर उनके प्रमाण-पत्रों का सत्यापन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
संदिग्ध प्रमाण-पत्रों की गहन जांच
बीएसए ने कहा कि दिव्यांग प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी पाने वाले शिक्षकों के शैक्षिक और दिव्यांग प्रमाण-पत्रों की गहन जांच की जाए। जिन मामलों में प्रमाण-पत्र संदिग्ध पाए जाएं, उनकी विस्तृत जांच कराई जाएगी ताकि सत्यता सामने आए। किसी भी तरह की अनियमितता या फर्जीवाड़ा पाए जाने पर संबंधित शिक्षक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कदम वास्तविक और ईमानदार शिक्षकों के हित में उठाया गया है, ताकि दिव्यांग कोटे का लाभ केवल योग्य और जरूरतमंद व्यक्तियों को ही मिले।
जिले में स्थिति
जिले में कुल 2463 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट स्कूल हैं, जिनमें करीब 10 हजार शिक्षक, शिक्षा मित्र और अनुदेशक कार्यरत हैं। इन स्कूलों में वर्तमान में 52 दिव्यांग शिक्षक तैनात हैं।
डॉ. रामजियावन मौर्य ने कहा, “परिषदीय स्कूलों में तैनात दिव्यांग शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की जांच का आदेश सभी बीईओ को दे दिया गया है। फर्जी प्रमाण-पत्र पाए जाने पर संबंधित शिक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”