बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट रहे अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वर्ष 2016 बैच के पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ कथित दुर्व्यवहार को अपने निर्णय का मुख्य कारण बताया है। इसके साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों पर भी तीखी आपत्ति दर्ज कराई है।
सोशल मीडिया पर सोमवार को उनकी एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें वे हाथ में पोस्टर लेकर खड़े नजर आए। पोस्टर पर लिखा था—
“#UGC_Rollback, काला कानून वापस लो, शंकराचार्य और संतों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।”
27 मई 2025 को संभाला था कार्यभार
कानपुर नगर के मूल निवासी अलंकार अग्निहोत्री का चयन वर्ष 2019 में डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ था। इससे पहले वे उन्नाव, बलरामपुर, एटा और लखनऊ में प्रशासनिक सेवाएं दे चुके हैं।
19 मई 1982 को जन्मे अलंकार ने 27 मई 2025 को बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के रूप में कार्यभार संभाला था।
सोशल मीडिया पर बनाया था “पुनरुत्थान बरेली परिवार” ग्रुप
बरेली में तैनाती के बाद उन्होंने “पुनरुत्थान बरेली परिवार” नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था, जिसमें वर्तमान में सैकड़ों लोग जुड़े हैं। इस्तीफे की सूचना भी सबसे पहले इसी मंच पर सामने आई।
ग्रुप के सदस्यों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं—कुछ लोगों ने उनके फैसले का समर्थन किया तो कुछ ने संवैधानिक पद पर बने रहने की सलाह दी।
यूजीसी के नए नियमों पर आपत्ति
अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि यूजीसी के नए कानून छात्रों के भविष्य और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। उनका आरोप है कि इन प्रावधानों से सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के साथ अन्याय होगा और इससे सामाजिक असमानता बढ़ेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी निराशाजनक है और समाज को खुलकर विरोध दर्ज कराना चाहिए।
इस्तीफे में क्या लिखा
अपने त्यागपत्र में अलंकार अग्निहोत्री ने उल्लेख किया है कि प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या स्नान के समय ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ पुलिस द्वारा कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया।
उन्होंने लिखा कि बटुक ब्राह्मण को जमीन पर गिराकर उसकी शिखा पकड़कर घसीटा गया, जो धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों का अपमान है। उन्होंने कहा कि इस घटना से वे व्यक्तिगत रूप से आहत हैं और इसे समाज की अस्मिता पर प्रहार बताया।
पत्र में आगे कहा गया है कि इस तरह की घटनाएं शासन और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने इसे चिंताजनक बताते हुए कहा कि यह समाज के एक बड़े वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला मामला है।