लखनऊ। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए विनियम-2026 को लेकर छात्रों और राजनीतिक दलों में विरोध बढ़ गया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि इस नियम से निर्दोषों को फंसाने और दोषियों को बचाने का खतरा है। उन्होंने इसे भाजपा की राजनीतिक चाल बताया और कहा कि पीडीए समाज को इससे कोई राहत नहीं मिलेगी।

छात्रों का प्रदर्शन
यूजीसी के नए विनियम के खिलाफ मंगलवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के गेट नंबर-1 पर सैकड़ों छात्रों ने धरना-प्रदर्शन किया। छात्रों का कहना था कि यह नियम समाज में विभाजन पैदा करने वाला है। उन्होंने "यूजीसी रोल बैक" के नारे लगाए और चेतावनी दी कि अगर सरकार ने इसे तुरंत वापस नहीं लिया तो आंदोलन तेज होगा। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने एसीपी को ज्ञापन सौंपकर नियम निरस्त करने की मांग की। इसमें शक्ति दुबे, अभिषेक वर्मा, आयुष सिंह राठौड़, राजन यादव, उदयवीर, हिमालय भारत, नमन राय और संजराज सहित सैकड़ों छात्र शामिल रहे।

ABVP ने भी जताया विरोध
एबीवीपी छात्र नेता उज्ज्वल त्रिपाठी ने कहा कि विश्वविद्यालय और कॉलेज ऐसे स्थान हैं जहां विभिन्न पृष्ठभूमि और जातियों के छात्र समान रूप से पढ़ते हैं। यूजीसी का नया नियम इसे तोड़ने का प्रयास है। आलोक मिश्रा ने चेतावनी दी कि नियम का दुरुपयोग कर सवर्ण छात्रों और शिक्षकों पर झूठे आरोप लगाए जा सकते हैं, जिससे शैक्षणिक वातावरण और मानसिक शांति प्रभावित होगी।

दलित और ओबीसी छात्र भी विरोध में
जतिन शुक्ला और शशि प्रकाश ने कहा कि इस नियम के खिलाफ बड़ी संख्या में एससी, एसटी और ओबीसी छात्र भी हैं। उनका कहना है कि नई गाइडलाइन सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करेगी और छात्रों के बीच संदेह और भय का माहौल पैदा करेगी।

छात्र दो धड़ों में बंटे
यूजीसी के नए नियम पर छात्र दो धड़ों में बंट गए हैं। एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों ने विरोध जताया है, जबकि कुछ सवर्ण और सामान्य वर्ग के छात्र इसे समर्थन नहीं दे रहे हैं। प्रिंस प्रकाश, राष्ट्रीय संयोजक, एनएसयूआई ने कहा कि छात्र जातिगत आधार पर बंट रहे हैं। वहीं प्रिंस कुमार, समाजवादी छात्र सभा के इकाई अध्यक्ष ने नए नियम का समर्थन करते हुए कहा कि इसका सकारात्मक असर आने वाला है।

यूजीसी की नई गाइडलाइन
यूजीसी ने 13 जनवरी को "Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulation-2026" अधिसूचित किया। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव रोकना है। नियमों के अनुसार हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में इक्वल अपॉर्च्युनिटी सेंटर और इक्वलिटी स्क्वाड का गठन अनिवार्य है। शिकायत मिलने पर 24 घंटे में बैठक और तय समय सीमा में कार्रवाई करना होगी। भेदभाव से जुड़े मामलों की वार्षिक रिपोर्ट यूजीसी को भेजना अनिवार्य है। नियमों के उल्लंघन पर अनुदान रोकने, पाठ्यक्रमों पर प्रतिबंध और गंभीर स्थिति में मान्यता रद्द करने का प्रावधान है।