अलीगढ़ के मथुरा रोड और खैर मार्ग पर फैक्ट्रियों और बूचड़खानों से निकलने वाले दूषित पानी से फसलें सिंचित की जा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस पानी में मौजूद भारी धातु जैसे लेड, क्रोमियम और कैडमियम अनाज और सब्जियों में शामिल होकर सीधे मानव शरीर में पहुंच रहे हैं। इससे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोग, लीवर की बीमारी, किडनी फेलियर और हृदय रोग जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं।

खतरनाक सिंचाई और दूषित नाले

खैर रोड और पुराना मथुरा बाईपास रोड पर नालों की जांच में दर्जनों पंपिंग सेट पाए गए, जो फैक्ट्रियों के कार्बनिक और रासायनिक कचरे से भरे पानी को खेतों तक पहुंचा रहे हैं। गेहूं, पालक, धनिया, लहसुन, भिंडी, गोभी और सरसों की फसलें इस दूषित पानी से सींची जा रही हैं।

विशेष रूप से मीट फैक्ट्रियों में मृत मुर्गों को नालों में बहाया जा रहा है, जिससे तीखी दुर्गंध फैल रही है और पानी पूरी तरह प्रदूषित हो गया है। समाजसेवी संजीव कौशिक का कहना है कि यदि किसानों को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का साफ पानी उपलब्ध कराया जाए तो वे इस तरह की सिंचाई नहीं करेंगे।

चिकित्सकों की चेतावनी

  • डॉ. अतहर कमाल, हृदय रोग विशेषज्ञ: "दूषित पानी से उगाई गई सब्जियों और अनाज में मौजूद हैवी मेटल सीधे शरीर में पहुंचते हैं। हर दूसरा व्यक्ति गैस्ट्रो रोग से पीड़ित है।"
  • डॉ. अभिनव वर्मा, पेट रोग विशेषज्ञ: "कीटाणु और टॉक्सिन सब्जियों व अनाज के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर गंभीर बीमारियां पैदा कर रहे हैं।"
  • डॉ. संजय तायल, फिजिशियन: "बिना ट्रीट किए नाले का पानी फसल में डालना खतरनाक है। इसका सेवन पेट, लीवर और हृदय को नुकसान पहुंचा सकता है।"
  • डॉ. विभव वार्ष्णेय, बाल रोग विशेषज्ञ: "दूषित पानी में उगाई गई सब्जियों से बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो रही है।"
  • डॉ. उमाशंकर वार्ष्णेय, एमडी पैथालॉजिस्ट: "इन फसलों में न्यूट्रीशनल एलिमेंट्स जैसे विटामिन, जिंक और मैग्नीशियम की कमी हो जाती है, जिससे शारीरिक विकास प्रभावित होता है।"

स्वास्थ्य पर असर

  • दूषित पानी में मौजूद ई-कोलाई और सैल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया सब्जियों और अनाज के माध्यम से पेट में पहुंचकर गैस्ट्रोएन्टराइटिस, उल्टी-दस्त, टाइफाइड, हैजा और हेपेटाइटिस-ए जैसी बीमारियां पैदा कर रहे हैं।
  • लंबे समय तक सेवन से लीवर में सूजन, पीलिया और क्रॉनिक लीवर डिजीज का खतरा बढ़ जाता है।
  • क्रोमियम और अन्य टॉक्सिक तत्व हृदय रोग और हाईपरटेंशन का कारण बन सकते हैं।

समाधान और सुझाव

  1. सिंचाई के लिए केवल शुद्ध और सुरक्षित पानी का उपयोग किया जाए।
  2. नालों के दूषित पानी का खेतों में उपयोग पूरी तरह बंद किया जाए।
  3. वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर प्रदूषित पानी को साफ किया जाए।
  4. किसानों और आम लोगों को जागरूक किया जाए कि ऑर्गेनिक या ट्यूबवेल पानी से उगाई गई सब्जियों का ही सेवन करें।