लखनऊ: 30 साल पहले हुए चुनाव में मतदान अधिकारी और अन्य लोगों के साथ मारपीट के आरोपों से समाजवादी पार्टी के तत्कालीन प्रत्याशी और वर्तमान कांग्रेस नेता राज बब्बर को अदालत ने बरी कर दिया है। एमपीएमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश हरबंस नारायण ने निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए राज बब्बर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।

निचली अदालत का फैसला और अपील

पहले, सात जुलाई 2022 को एमपीएमएलए कोर्ट के विशेष एसीजेएम अम्ब्रिश श्रीवास्तव ने राज बब्बर को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा और 6500 रुपये का जुर्माना सुनाया था। इसमें धारा 143 के तहत छह महीने की कैद और 1000 रुपये जुर्माना, धारा 332 के तहत दो साल की कैद और 4000 रुपये जुर्माना, धारा 353 के तहत एक साल की कैद और 1000 रुपये जुर्माना तथा धारा 323 के तहत छह माह की कैद और 500 रुपये जुर्माना शामिल था।

राज बब्बर ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दाखिल की, जिसे एमपीएमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश हरबंस नारायण ने स्वीकार कर लिया। सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें बरी कर दिया।

मामला 1996 का

पत्रावली के अनुसार यह मामला दो मई 1996 को दर्ज किया गया था। मतदान अधिकारी कृष्ण सिंह राणा ने थाना वजीरगंज में राज बब्बर, अरविंद यादव और अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि मतदान केंद्र संख्या 192/103 के बूथ संख्या 192 पर मतदाताओं के जाने के बाद, राज बब्बर अपने साथियों के साथ आए और फर्जी मतदान का झूठा आरोप लगाते हुए मतदान अधिकारी और वादी को पीटा।

इस दौरान मतदान केंद्र के अन्य अधिकारियों और पुलिस कर्मियों ने बीच-बचाव किया। पुलिस ने मामले में विवेचना की और 23 सितंबर 1996 को चार्जशीट कोर्ट में पेश की। सुनवाई के दौरान अरविंद यादव की मृत्यु के कारण उनके खिलाफ मामला बंद कर दिया गया, जबकि राज बब्बर के खिलाफ सात मार्च 2020 को आरोप तय किए गए थे।

अदालत का अंतिम फैसला

गवाहों की गवाही और सबूतों की समीक्षा के बाद अदालत ने प्रारंभिक सजा दी थी, लेकिन अपील में विशेष न्यायाधीश ने निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया और राज बब्बर को सभी आरोपों से बरी कर दिया।