संगम की रेती पर फैले माघ मेले की भीड़ में आस्था के बीच एक गहन पीड़ा भी महसूस की जा रही थी। आगरा से आए राजीव कुशवाहा और उनकी पत्नी पूनम अपने लापता बेटे शिव कुशवाहा की तस्वीर लेकर हर चेहरे में अपने लाल को खोजते दिखाई दिए।
दंपती के मुताबिक उनका इकलौता बेटा 24 जून 2025 से लापता है। तस्वीर को सीने से लगाए वे संगम के प्रत्येक घाट – नोज, अक्षय वट, हनुमान मंदिर, राम घाट और महावीर रोड तक – लोगों से पूछते रहे कि कहीं उन्होंने यह लड़का देखा है। भीड़ के शोर में उनकी आवाज़ कई बार दब जाती, लेकिन उम्मीद की किरण के साथ हर बार वही सवाल दोहराया गया।
राजीव और पूनम ने बताया कि उन्होंने हर संभव कोशिश की – पोस्टर लगाए, फोन किए, अनजान नंबरों पर भरोसा किया – लेकिन हर बार निराशा हाथ लगी। फिर भी उम्मीद ने उन्हें रोक नहीं पाया। माघ मेले में लाखों श्रद्धालु आते हैं, इस सोच के साथ उन्होंने संगम तट पर कदम रखा। भीड़ के बीच रुक-रुक कर फोटो दिखाना और लोगों से पूछना उनका दिनचर्या बन गया।
मां पूनम की आंखों में आंसू और हाथों की कांपती हलचल, पिता राजीव की चुप्पी और फोटो को सीधा रखने का तरीका – सब दर्शाता था कि उनके लिए हर सांस का मकसद सिर्फ एक है: बेटे को ढूंढ निकालना। राजीव कहते हैं, “आंखें पथरा गई हैं, लेकिन उम्मीद जिंदा है। जब तक सांस है, तलाश जारी रहेगी।”
मेले में उनकी कहानी कई लोगों को छू गई। कुछ ने फोटो अपने फोन में लिया, कुछ ने सोशल मीडिया पर साझा करने का भरोसा दिया, तो किसी ने पुलिस हेल्पडेस्क तक का रास्ता दिखाया। छोटी-छोटी मदद उनके लिए बड़ी सहारा बन गई।
पूनम ने बताया कि उन्होंने गंगा मैया से बेटे की सलामती की मनौती मांगी है। उनका विश्वास है कि शिव लौटेगा और तब वे फिर गंगा में स्नान के लिए आएंगे।