उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के कौशांबी इलाके में जासूसी से जुड़े एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। विशेष जांच दल (SIT) ने 20 मार्च को कार्रवाई करते हुए इस मामले में नौ और लोगों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये सभी एक पाकिस्तानी संपर्क के लिए संवेदनशील जानकारी जुटाने में लगे थे।

यूपी से बिहार तक फैला नेटवर्क

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में मेरठ के परतापुर निवासी गणेश, शास्त्री नगर का गगन कुमार, बिहार के पूर्णिया के ओली टोला निवासी विवेक और जौनपुर के शाहगंज क्षेत्र के दुर्गेश शामिल हैं। इसके अलावा मेरठ, गाजियाबाद और कौशांबी से पांच नाबालिगों को भी हिरासत में लिया गया है। जांच में पता चला है कि ये लोग ‘सरदार’ उर्फ सरफराज उर्फ जोगा सिंह नाम के पाकिस्तानी हैंडलर से जुड़े हुए थे और मैसेजिंग ऐप के जरिए लगातार संपर्क में रहते थे।

सैन्य ठिकानों की करते थे रेकी

नाबालिग आरोपी शॉर्ट वीडियो बनाने के नाम पर संवेदनशील सैन्य क्षेत्रों के आसपास पहुंचते थे और वहां की तस्वीरें व वीडियो रिकॉर्ड कर भेजते थे। साथ ही, इन लोकेशनों की जानकारी भी अलग-अलग ऐप के माध्यम से साझा की जाती थी। एडीसीपी राजकरन नैय्यर ने बताया कि मामले की गहन जांच जारी है।

पैसों का लेन-देन ऐसे होता था

जासूसी के बदले आरोपियों को 500 से 5000 रुपये तक की रकम दी जाती थी। भुगतान सीधे न होकर अलग-अलग माध्यमों से किया जाता था, ताकि पहचान छिपी रहे। इसके लिए जन सेवा केंद्रों के जरिए ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कराकर बाद में नकद निकासी की जाती थी।

दो मुख्य आरोपी अब भी फरार

SIT के अनुसार, इस नेटवर्क के दो प्रमुख सदस्य अभी भी गिरफ्त से बाहर हैं। इनमें बिहार के मुजफ्फरपुर का नौशाद अली और भागलपुर का समीर उर्फ शूटर शामिल हैं। पुलिस उनकी तलाश में कई जगहों पर दबिश दे रही है और जल्द गिरफ्तारी की उम्मीद जताई जा रही है।