गाजियाबाद के संगम विहार स्थित पांच मंजिला इमारत में लगी आग में घायल हुई 26 वर्षीय नीतू की चार दिन तक इलाज के बाद रविवार को मौत हो गई। इस घटना में पहले ही उसके माता-पिता की जान जा चुकी थी। नीतू के भाई का अभी भी अस्पताल में इलाज चल रहा है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार सभी की मौत धुएं के असर से हुई हो सकती है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।

परिवार के बचे सदस्य के लिए स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है। माता-पिता की मृत्यु के बाद पहले ही टूट चुके परिवार पर नीतू की मौत ने नई चोट दी है। वहीं, नीतू के भाई की हालत भी गंभीर बनी हुई है।

दमकल विभाग के अनुसार, आग की शुरुआत प्रथम तल पर स्थित राजेंद्र प्रसाद के फ्लैट से हुई थी। नीतू को आग लगने के दौरान गंभीर चोटें आई थीं और धुएं के कारण वे अपने माता-पिता को बचा नहीं पाई और स्वयं भी असहाय रही।

हादसे के बावजूद पुलिस ने अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं किया है। हालांकि, किसी ने शिकायत नहीं दी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बिल्डर और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ स्वतः मामला दर्ज होना चाहिए था। आग के बाद दमकल विभाग और पीडब्ल्यूडी ने पूरे परिसर के 43 परिवारों को खाली कराया, लेकिन प्रभावितों की मदद और राहत अभी तक पर्याप्त नहीं पहुंची है।

इस आग हादसे की रात, यानी 3 मार्च को, दमकल कर्मियों ने इमारत पर नियंत्रण पाकर 200 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। 22 लोग गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे और उन्हें दिल्ली के अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। मृतक परिवार मूलरूप से गोपालगंज, बिहार के रहने वाले थे।

एसीपी इंदिरापुरम ने नीतू की मौत की पुष्टि की है और एसीपी अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस अब इस मामले में मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई करेगी।