उत्तर प्रदेश के लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए पर कांग्रेस के अगुवाई वाला इंडिया गठबंधन भारी पड़ा. सूबे में सभी दलों ने अपने-अपने हिसाब से सियासी बिसात बिछाए थे और जातीय आधार पर टिकट बंटवारे किए थे. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फॉर्मूले वाले दांव से एनडीए को चारों खाने चित कर दिया है जबकि बीजेपी की सारी सोशल इंजीनियरिंग इस बार धरी की धरी रह गई. कांग्रेस का साथ और सपा का पीडीए दांव इंडिया गठबंधन के लिए हिट तो ओबीसी समुदाय के लिए सुपरहिट साबित हुआ है.
बीजेपी ने इस बार लोकसभा चुनाव में सवर्ण पर भरोसा जताया था तो सपा ने गैर यादव ओबीसी और दलित प्रत्याशियों पर विश्वास जताया था. इसीलिए यूपी में बीजेपी से सवर्ण सांसद सबसे ज्यादा चुनकर आए हैं तो सपा से ओबीसी सांसद जीतने में सफल रहे हैं. दलित सांसद इस बार एनडीए से ज्यादा इंडिया गठबंधन से जीतने में कामयाब रहे हैं. उत्तर प्रदेश में ठाकुर सांसदों की संख्या घट गई है तो ब्राह्मण सांसदों ने अपने नंबर को बनाए रखा है. सूबे में भले ही पांच मुस्लिम लोकसभा सांसद जीतने में सफल रहे हैं, लेकिन पिछली बार से कम हुए हैं तो दलित सांसदों की संख्या बढ़ गई है.
उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 35 ओबीसी लोकसभा सांसद चुनकर आए हैं, जिनमें से सबसे ज्यादा 22 सांसद इंडिया गठबंधन से जीते हैं और 13 सांसद एनडीए से जीते हैं. इस बार 23 सवर्ण सांसद यूपी से चुने गए हैं, जिनमें 15 एनडीए से जीते हैं तो 8 इंडिया गठबंधन चुने गए हैं. सवर्ण जातियों के सबसे ज्यादा ब्राह्मण जीते हैं तो ओबीसी जातियों में कुर्मी सांसद जीतने में सफल रहे हैं.दलितों में देखें तो पासी समुदाय के सांसद सबसे ज्यादा चुने गए हैं जबकि जाटवों की संख्या घट गई है.