मेरठ: कपसाड़ गांव में दलित महिला सुनीता की हत्या और उनकी बेटी रूबी के अपहरण के मामले में पीड़ित परिवार ने पुलिस और प्रशासन पर लगातार नजरबंदी और उनकी बात न सुनने का आरोप लगाया है। मृतका के पति सतेंद्र ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अनुसूचित जाति होने के कारण उन्हें न्याय नहीं मिल रहा और उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है।
सुनीता के पुत्र नरसी का आरोप है कि उनके परिवार को 24 घंटे पुलिस की निगरानी में रखा गया है। उन्हें किसी रिश्तेदार से मिलने या बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही। नरसी ने यह भी दावा किया कि प्रशासन उनके फोन पर निगरानी रख रहा है।
घटना आठ जनवरी की है, जब गांव के ही युवक पारस सोम ने रूबी का अपहरण किया था। विरोध करने पर आरोपी ने सुनीता पर धारदार हथियार से हमला किया, जिससे उनका इलाज के दौरान निधन हो गया। इसके बाद से परिवार पर पुलिस-प्रशासन द्वारा लगातार सख्ती बरती जा रही है, जिससे उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। नरसी ने कहा कि इसी वजह से उनकी बहन रूबी की अप्रैल में तय हुई शादी टलने की संभावना है।
आश्वासन और वास्तविकता में अंतर
नरसी ने बताया कि प्रशासन ने घटना के बाद परिवार को कई आश्वासन दिए थे, जिनमें पिस्टल लाइसेंस, भूमि का पट्टा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का वादा शामिल था। हालांकि अब नौकरी देने की जगह केवल गोशाला में ही देने का प्रस्ताव रखा गया है, जबकि पहले दौराला या खतौली शुगर मिल में नौकरी देने का वादा किया गया था।
राजनीतिक संवेदनशीलता
कपसाड़ कांड राजनीतिक रूप से भी सुर्खियों में आया। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, बसपा सुप्रीमो मायावती और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इस मामले पर सार्वजनिक रूप से चिंता जताई और सरकार से जवाब मांगा।
नरसी ने बताया कि बृहस्पतिवार को तहसील में एसडीएम उदित नारायण सेंगर और सीओ आशुतोष से मुलाकात की गई। बैठक में नौकरी के लिए केवल गोशाला का विकल्प सामने आया। इसके कारण रूबी की शादी प्रभावित हो सकती है। लड़के के परिवार ने पहले ही सहमति दे दी थी, लेकिन पुलिस की सख्ती के चलते मुलाकात नहीं हो पा रही है।
प्रशासन की ओर से मुआवजे के तौर पर 50 लाख रुपये देने का आश्वासन मिला था, लेकिन अब तक केवल 10 लाख रुपये ही मिले हैं, जिससे परिवार आर्थिक संकट झेल रहा है।
सुरक्षा और धमकियों के आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि मीडिया में खबरें आने पर पुलिसकर्मी नरसी से मिलने आए और उन्हें धमकाने की कोशिश की। नरसी ने कहा कि उन्हें लगातार मानसिक और शारीरिक दबाव में रखा जा रहा है।
सीओ का पक्ष
सीओ सरधना आशुतोष कुमार ने कहा कि परिवार को शासन के निर्देश के अनुसार सुरक्षा दी गई है। उनके आने-जाने पर कोई रोक नहीं है। परिवार द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं और उन्हें समझाया जाएगा।