मुजफ्फरनगर। हिंदू धर्म में विवाहेतर संबंध (Adultery/व्यभिचार) को एक महापाप और सामाजिक विनाश का कारण माना गया है, जो अंततः पारिवारिक जड़ों को काट देता है और पूरे सामाजिक ताने-बाने का विनाश कर देता है।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के एक पुत्र प्रतीक यादव की असमय मृत्यु दुखद है, लेकिन उनके जन्म की कहानी समाज में अनैतिकता का सवाल खड़ा करती है।
उत्तर प्रदेश के इटावा की निवासी साधना गुप्ता का पहला विवाह वर्ष 1986 में फर्रुखाबाद निवासी चंद्र प्रकाश गुप्ता से हुआ था। प्रतीक यादव का जन्म वर्ष 1987 में हुआ था। बताया जाता है कि इसके बाद साधना गुप्ता और चंद्र प्रकाश गुप्ता के बीच वर्ष 1990 में तलाक हो गया था।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की पहली पत्नी मालती देवी के वर्ष 2003 में निधन के बाद, मुलायम सिंह यादव ने सार्वजनिक रूप से साधना गुप्ता को अपनी दूसरी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था और वर्ष 2007 में प्रतीक यादव को भी स्वीकार किया था।
सवाल उठता है कि क्या विवाहेतर संबंधों से पैदा संतानों को समाज में वह स्वीकृति मिलती है जो वैध वैवाहिक संबंधों से पैदा संतानों को मिलती है? क्योंकि प्रतीक यादव की मां साधना गुप्ता उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के साथ विवाहेतर संबंधों में लिप्त थीं।
इसी तरह की मृत्यु पूर्व मुख्यमंत्री एन.डी. तिवारी के जैविक पुत्र रोहित शेखर की हुई थी। उनकी मां उज्ज्वल शर्मा भी पूर्व मुख्यमंत्री एन.डी. तिवारी के साथ विवाहेतर संबंधों में लिप्त थीं।
यह सच है कि प्रतीक के जन्म के समय साधना गुप्ता की शादी पहले पति से थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 1994 से ही स्कूल रिकॉर्ड में मुलायम सिंह यादव को उनके पिता के रूप में दर्ज किया गया था, जबकि शुरुआत में प्रतीक के स्कूल रिकॉर्ड में उनके पिता का नाम 'चंद्र प्रकाश गुप्ता' ही दर्ज था।
प्रतीक यादव जैविक रूप से (Biologically) मुलायम सिंह यादव के पुत्र नहीं थे, बल्कि साधना गुप्ता के पहले पति चंद्र प्रकाश गुप्ता के बेटे थे।
यह मामला तब पूरी तरह सार्वजनिक हुआ, जब मुलायम सिंह यादव पर आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) का मामला चला। सीबीआई ने जांच के दौरान पाया कि प्रतीक का जन्म जुलाई 1987 में हुआ था, जबकि साधना और उनके पहले पति का तलाक 1990 में हुआ।
हलफनामा देने से जैविक या कानूनी पितृत्व नहीं बदलता। किसी अन्य के बच्चे को पूरी तरह से अपना कानूनी वारिस या पुत्र बनाने के लिए हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम (HAMA), 1956 या केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के नियमों के तहत 'गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया' (Adoption Deed/Order) पूरी करनी पड़ती है। इसमें मूल जैविक पिता चंद्र प्रकाश गुप्ता की सहमति या अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) की भी आवश्यकता होती है, जो कभी नहीं हुई थी।
इस प्रकार कानूनन, जुलाई 1987 में जन्मे प्रतीक के जैविक और मूल कानूनी पिता चंद्र प्रकाश गुप्ता ही थे। मुलायम सिंह यादव द्वारा दिया गया हलफनामा प्रतीक को उनका 'जैविक पुत्र' नहीं बनाता था, बल्कि वह केवल उनके सौतेले पिता (Step-father) और कानूनी अभिभावक (Legal Guardian) होने की सामाजिक और वित्तीय जिम्मेदारी की आधिकारिक स्वीकारोक्ति थी।
सर विलियम जोन्स (Sir William Jones) द्वारा वर्ष 1794 में किए गए मनुस्मृति के अंग्रेजी अनुवाद के अनुसार, हिंदू धर्मग्रंथों (जैसे मनुस्मृति और गरुड़ पुराण) में विवाहित रहते हुए किसी अन्य पुरुष या स्त्री से संबंध बनाने को 'व्यभिचार' की श्रेणी में रखा गया है। इसे गंभीर धार्मिक पाप और सामाजिक मर्यादा का उल्लंघन माना गया है। तथा जब जुलाई 1987 में प्रतीक यादव का जन्म हुआ था, तब भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 497 के तहत विवाहेतर संबंध (Adultery/व्यभिचार) एक दंडनीय आपराधिक अपराध था।
वर्ष 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश सेना, नौसेना और वायुसेना के जवानों पर लागू नहीं होगा, क्योंकि सेना अनुशासन बनाए रखने के लिए एडल्ट्री के मामलों में अपने नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई कर सकती है।
अंग्रेज लेखकों और इतिहासकारों ने अपने शोध में कहा है कि हिंदू धर्मग्रंथों में पारिवारिक निष्ठा (Fidelity) को धर्म की धुरी माना गया है। कोई भी विवाहित स्त्री यदि किसी अन्य पुरुष से विवाहेतर संबंध रखती है या संतान उत्पन्न करती है, तो वह कृत्य हिंदू धर्मशास्त्रों, सामाजिक मूल्यों और प्राचीन न्यायशास्त्र के अनुसार एक गंभीर 'अधर्म' और 'पाप' की श्रेणी में गिना जाता है।
सार्वजनिक जीवन जीने वाले व्यक्तियों के निर्णय भी समाज के सामने नैतिक आचरण के होने चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख लेखक के निजी विचारों पर आधारित है। दैनिक देहात टीम का इससे कोई संबंध या सहमति नहीं है।