केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों को देखते हुए खुदरा ईंधन दरों में कमी का कोई ठोस आधार नहीं बनता।
गुरुवार को दिए बयान में मंत्री ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में ईंधन की कीमतें काफी हद तक स्थिर रही हैं। पिछले चार वर्षों में पेट्रोल की कीमतों में लगभग 5.58 प्रतिशत और डीजल की कीमतों में करीब 6.23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
पुरी ने यह भी बताया कि सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) अभी भी बड़े वित्तीय दबाव का सामना कर रही हैं। इन कंपनियों को अब तक लगभग 2.18 लाख करोड़ रुपये का घाटा वहन करना पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें कई बार ईंधन लागत से कम दाम पर बिक्री करनी पड़ी है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में तेल कंपनियों के पास वह कच्चा तेल मौजूद है, जिसे ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर खरीदा गया था। ऐसे में तुरंत कीमतें घटाना व्यावहारिक नहीं होगा। मंत्री ने कहा कि अगर आने वाले कुछ महीनों तक कच्चे तेल की कीमतें स्थिर और कम रहती हैं, तो इस पर विचार किया जा सकता है।
मंत्री ने यह भी बताया कि हाल के वैश्विक तनाव, खासकर पश्चिम एशिया में अस्थिरता के बावजूद भारत ने ईंधन आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित नहीं होने दिया। देशभर के करीब 1.07 लाख पेट्रोल पंप बिना किसी बाधा के सामान्य रूप से काम करते रहे।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 30 जून तक तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर लगभग 74,781 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। यह घाटा उस समय बढ़ा जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें अचानक ऊपर चली गई थीं।
पुरी ने समझाया कि तेल कंपनियां आमतौर पर कच्चा तेल पहले से खरीदती हैं, इसलिए मौजूदा समय में उपयोग किया जा रहा तेल कुछ महीने पहले ऊंची कीमतों पर खरीदा गया था। इसी वजह से तुरंत खुदरा दरों में राहत देना संभव नहीं है।
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सरकार की दीर्घकालिक योजना पर भी मंत्री ने प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 2030 तक भारत की रिफाइनिंग क्षमता बढ़कर लगभग 309.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक पहुंचने का अनुमान है। कई रिफाइनरी विस्तार और नई परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं, जो देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करेंगी।