मुजफ्फरनगर: बहुचर्चित होमगार्ड रतिराम हत्याकांड में करीब छह साल बाद अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने आरोपी दीपक को दोषी करार देते हुए उसे फांसी की सजा (मृत्युदंड) सुनाई। अदालत ने यह फैसला गवाहों के बयान और अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए ठोस सबूतों के आधार पर दिया।

गश्त के दौरान हुआ था हमला
यह घटना 4 जून 2020 की है। शहर कोतवाली क्षेत्र के बुढ़ाना मोड़ पुलिस चौकी पर तैनात कांस्टेबल इस्लाम और होमगार्ड रतिराम रात के समय गश्त पर थे। इसी दौरान डीलर वाली गली से एक घर में महिला के चीखने की आवाज सुनाई दी।
पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे तो पाया कि घर के अंदर दीपक और उसकी मां राजबाला के बीच विवाद चल रहा था। पुलिस के हस्तक्षेप करने पर आरोपी भड़क गया और गाली-गलौज करने लगा। इसी दौरान उसने होमगार्ड रतिराम पर चाकू से पेट में हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल रतिराम को अस्पताल ले जाया गया, जबकि आरोपी मौके से फरार हो गया।
इलाज के दौरान हुई मौत, बढ़ी धाराएं
हमले के बाद पुलिस ने पहले जानलेवा हमले का मामला दर्ज किया था। बाद में 4 अक्टूबर 2020 को मेरठ में इलाज के दौरान रतिराम की मौत हो गई। इसके बाद मृतक के बेटे अर्जुन की तहरीर पर मामले में हत्या की धाराएं जोड़ दी गईं।
13 गवाहों के बाद आया फैसला
अभियोजन पक्ष के सहायक शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार के अनुसार, अदालत में कुल 13 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने 24 जून 2026 को दीपक को दोषी ठहराया और 2 जुलाई 2026 को उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई।

केस की टाइमलाइन
- 4 जून 2020: गश्त के दौरान होमगार्ड पर चाकू से हमला
- 5 जून 2020: आरोपी दीपक गिरफ्तार
- 4 अक्टूबर 2020: इलाज के दौरान रतिराम की मौत
- 13 अक्टूबर 2020: हत्या की धाराओं के साथ चार्जशीट दाखिल
- 5 नवंबर 2020: अतिरिक्त आरोपपत्र कोर्ट में प्रस्तुत
- 19 दिसंबर 2020: आरोपी पर आरोप तय
- 24 जून 2026: अदालत ने दोषी घोषित किया
- 2 जुलाई 2026: फांसी की सजा सुनाई