मुजफ्फरनगर। शहर के नामी मनोचिकित्सक डॉ. नरेश त्यागी पर मुकदमा दर्ज हुआ है। उनके छोटे भाई डॉ. संजीव त्यागी ने पैतृक मकान को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। एफआईआर में उनके भाई, एक महिला अधिवक्ता समेत 8 लोगों का नाम है। थाना सिविल लाइन पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

एक दिन पहले अहमदाबाद के लिए निकले थे
दक्षिणी सिविल लाइंस के रहने वाले डॉ. संजीव त्यागी ने थाना सिविल लाइन में तहरीर दी। डॉ. संजीव त्यागी ने बताया कि घटना 3 सितम्बर 2022 की है। वह सुबह अपने घर से किसी जरूरी सरकारी बैठक के लिए देहरादून से अहमदाबाद के लिए फ्लाइट पकड़ने के लिए तैयारी में थे।

06.30 बजे अपने घर से निकल गए। तभी एक पुलिसकर्मी विकास कुमार का फोन आया। काल फ्लाइट के टेक ऑफ होने के 10 मिनट पहले आई। पुलिसकर्मी ने उनको बताया कि उनके भाई और उसकी टीम ने घर की दीवार को ड्राइंग रूम से किचन तक गिरा दिया गया। पुलिसकर्मी ने थाने में आने के लिए कहा और फोन काट दिया।

पुलिसकर्मी की सूचना के बाद सीधे घर पहुंचे
डा. संजीव ने पुलिस को बताया कि सूचना के बाद वह अपने घर में अतिचार और डकैती के डर से विमान से उतरे। सीधे मुजफ्फरनगर लौट आए। उन्होंने देखा कि घर को चारों तरफ से बंद कर दिया गया था, लेकिन ड्राइंग रूम की तरफ से तोड़ा गया था।

जब उन्होंने अपने प्रतिनिधि के साथ जांच की तो पता चला कि पूरी विध्वंस कार्य में एक महिला वकील और उनके बड़े भाई डा. नरेश त्यागी की उपस्थिति रही। डा. नरेश त्यागी के सभी गुर्गे/कंपाउंडर मुकेश, मिंटू, संजय, भोला, निवेश, आशीष और उसके अधीन और बाहर से कुछ अज्ञात व्यक्ति, दीवार तोड़ने में सहयोगी थे।

पुलिस के आने के बाद भी दीवार को गिराना जारी रखा
डा. संजीव त्यागी ने कहा कि दीवार टूटने के बाद अब घर में रहना उनके लिए बहुत जोखिम भरा हो गया है, क्योंकि खाना इसी रसोई में तैयार होता है। आरोप लगाया कि मौके पर पुलिस के आने के बाद भी दीवार को गिराना जारी रखा। डा. संजीव त्यागी की तहरीर पर थाना सिविल लाइन पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

डा. संजीव त्यागी ने बताया कि उनके पिता जगदीश चंद्र त्यागी का 3 जून 2022 को बीमारी के कारण निधन हो गया था। उनके पिता एक सरकारी वकील थे। वह एक प्रमुख आपराधिक वकील भी रहे। वह अपनी (एचयूएफ) हिन्दू अभिवाजित परिवार के तहत मिली पैतृक संपत्ति में लगभग 50 से अधिक वर्षों तक सिविल लाइन दक्षिणी के मकान में रहे, जो कि न्यायाधीन है।