मुजफ्फरनगर। मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवहन योजना के तहत संचालित बसों के परमिट धारकों ने जिले में चल रहे अवैध डग्गामार वाहनों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बस संचालकों ने आरोप लगाया है कि बिना परमिट चल रहे ये वाहन उनके नियमित संचालन में बाधा बन रहे हैं, जिससे उन्हें लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

सोमवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में परमिट धारक विपिन कुमार गोयल ने बताया कि जिले में इस योजना के तहत कुल 39 बसों के परमिट जारी किए गए हैं, जिनमें से फिलहाल 26 बसें विभिन्न ग्रामीण रूटों पर संचालित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि ये 18 और 28 सीटर बसें लगभग 25 लाख रुपये की लागत से चलाई जा रही हैं।
बस संचालकों का कहना है कि जिला अस्पताल से पुरकाजी सहित कई ग्रामीण मार्गों पर अवैध डग्गामार वाहन खुलेआम सवारियां ढो रहे हैं, जिससे उनकी बसों की सवारी प्रभावित हो रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग कथित किसान संगठनों की आड़ लेकर परिवहन व्यवस्था में व्यवधान उत्पन्न कर रहे हैं। साथ ही, संचालकों ने यह दावा भी किया कि प्रभावशाली डग्गामार चालकों के दबाव में उनकी बसों के चालान किए जा रहे हैं।
प्रेस वार्ता में मौजूद योगेंद्र कुमार और तोसीफ अहमद ने बताया कि इस मामले को लेकर उन्होंने कई बार एआरटीओ, एसपी सिटी और जिलाधिकारी से शिकायत की है। उनके अनुसार, अधिकारियों की ओर से 15 दिनों के भीतर जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
संचालकों ने कहा कि मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवहन योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ती और सुगम परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है, जिसके तहत चलने वाली बसों का किराया रोडवेज से करीब 10 प्रतिशत कम रखा गया है। उन्होंने प्रशासन से अवैध वाहनों पर सख्त कार्रवाई करने और वैध परमिट धारकों को राहत देने की मांग की है।