मुजफ्फरनगर। एनसीआर क्षेत्र के मुजफ्फरनगर में वायु प्रदूषण की जांच के लिए मंगलवार को लखनऊ से मुख्य पर्यावरण अधिकारियों की टीम पहुंची। टीम ने महालक्ष्मी पेपर मिल में निरीक्षण किया और आरडीएफ के सैंपल जांच के लिए एकत्रित किए। वहीं, सिखरेड़ा में दो प्लास्टिक गोदामों में प्रदूषण फैलाने वाले कचरे के भंडारण को लेकर गोदामों को सील कर दिया गया।

सीओ नई मंडी राजू कुमार साव के नेतृत्व में जांच टीम को स्थानीय अधिकारियों के साथ कार्रवाई करते समय भाकियू अराजनैतिक के पदाधिकारियों ने घेराव कर विरोध किया। इस दौरान अधिकारियों को चार बार पुलिस सुरक्षा की आवश्यकता पड़ी। अंततः पुलिस की सुरक्षा में लखनऊ की टीम जिले का बॉर्डर पार कर वापस लौट गई।

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जोन-2 के मुख्य पर्यावरण अधिकारी राधेश्याम और जोन-3 के मुख्य पर्यावरण अधिकारी प्रवीण कुमार ने अपने अभियान की शुरुआत जानसठ रोड स्थित महालक्ष्मी पेपर मिल से की। निरीक्षण के दौरान टीम ने आरडीएफ व अन्य सैंपल लिए। इसके बाद सिखरेड़ा स्थित दो बड़े प्लास्टिक गोदामों को अवर अभियंता कुंवर संतोष, जेई राजा गुप्ता और संध्या शर्मा के मार्गदर्शन में सील किया गया।

भाकियू अराजनैतिक के पदाधिकारियों ने जांच के दौरान टीम का घेराव किया और अधिकारियों पर दबाव डालने का प्रयास किया। स्थानीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने पुलिस से सुरक्षा मांगी। दोपहर में टीम मूलचंद रेस्टोरेंट में भोजन कर रही थी, तब भी भाकियू कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया और अधिकारियों को घेर लिया। अधिकारियों ने परिस्थितियों को देखते हुए जांच अभियान समाप्त कर लौटने का निर्णय लिया।

भाकियू अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेन्द्र मलिक ने आरोप लगाया कि आरडीएफ के बजाय एमएसडब्ल्यू के जलने की स्थिति के बावजूद अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई नहीं की और औद्योगिक इकाइयों के पक्ष में होटल में बैठक की। उन्होंने कहा कि किसानों और स्थानीय जनता की बातों को अनसुना किया गया।

गीतेश चंद्रा, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण बोर्ड मुजफ्फरनगर ने बताया कि केवल एक पेपर मिल में जांच पूरी हो सकी और सिखरेड़ा में दो प्लास्टिक गोदाम सील किए गए। उन्होंने कहा कि जब्त सैंपल को नुकसान पहुंचाना गंभीर मामला है, जिसे उच्च अधिकारियों तक रिपोर्ट किया गया।