लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अयोध्या और अन्य धार्मिक स्थलों से जुड़े कथित चंदा व दान में अनियमितताओं को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चंदा चोरी की जांच की प्रगति पर नियमित रूप से सार्वजनिक ब्रीफिंग होनी चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

अखिलेश यादव ने मथुरा में सामने आए कथित मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि इनकी भी उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या में दान और चढ़ावे से जुड़ी घटनाओं के बाद लोगों की आस्था पर असर पड़ा है और इसका सीधा प्रभाव स्थानीय कारोबार और आम जनता की आय पर भी दिख रहा है।

सपा अध्यक्ष ने कहा कि अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों में इस पूरे मामले को लेकर असंतोष और आक्रोश बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों पर सवाल उठ रहे हैं, वे जवाब देने के बजाय भूमिगत हो गए हैं, जिससे स्थिति और अधिक संदिग्ध बन गई है। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय लोग जांच के माहौल को लेकर असहज महसूस कर रहे हैं और भय का वातावरण बन रहा है।

अखिलेश यादव ने मांग की कि जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर नियमित जानकारी सार्वजनिक की जाए, क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों में लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता ही जनता के विश्वास को बहाल कर सकती है।

मुख्यमंत्री के अयोध्या दौरे पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों को लेकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने दावा किया कि इससे राज्य की राजनीति पर असर डालने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि जांच प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का दबाव या हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे पहले से ही विवादों में घिरी जांच और अधिक संदिग्ध हो जाती है।

अखिलेश यादव ने अंत में कहा कि जनता अब हर स्तर पर जवाब चाहती है और दान, चढ़ावे तथा अन्य संसाधनों का पूरा हिसाब पारदर्शी तरीके से सामने आना चाहिए ताकि किसी प्रकार का संदेह न रहे।