लखनऊ। प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण दर्ज न करने वाले कर्मचारियों पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी।

निर्णय के तहत ऐसे कर्मचारियों के जनवरी और फरवरी माह के रोके गए वेतन को जारी करने का आदेश दिया गया है, लेकिन इसके साथ ही विभागीय स्तर पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित विभागाध्यक्ष, अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिवों पर तय की जाएगी।

सरकारी निर्देशों के अनुसार, संपत्ति का विवरण दर्ज न करने वाले कर्मचारियों को पदोन्नति, एसीपी (Assured Career Progression) और अन्य सेवा लाभों से वंचित किया जाएगा। इसके अलावा उन्हें विदेश यात्रा, प्रतिनियुक्ति और अन्य मामलों में आवश्यक विजिलेंस क्लियरेंस भी नहीं मिलेगा।

शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी प्रतिबंधित कर्मचारी का वेतन फिर भी जारी किया गया, तो संबंधित आहरण-वितरण अधिकारी (DDO) की जवाबदेही तय की जाएगी और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

यह आदेश एसपी गोयल द्वारा जारी शासनादेश के आधार पर कार्मिक विभाग की ओर से लागू किया गया है। इसमें कहा गया है कि उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के तहत सभी कर्मचारियों के लिए मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति विवरण देना अनिवार्य है।

सरकार ने इसके लिए पहले 31 जनवरी 2026 तक की समयसीमा निर्धारित की थी, जिसे बाद में 10 मार्च तक बढ़ाया गया, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने विवरण दर्ज नहीं किया।

नियमों के अनुसार समयसीमा का पालन न करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी और इस वर्ष उनकी पदोन्नति पर भी विचार नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्हें एसीपी का लाभ और अन्य प्रशासनिक अनुमतियां नहीं मिलेंगी।

सरकार ने यह भी दोहराया है कि पहले ही निर्देश दिए जा चुके हैं कि ऐसे कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर रोक लगाई जाए। यदि इसके बावजूद वेतन जारी किया गया है तो संबंधित DDO पर कार्रवाई तय होगी।

मुख्य सचिव ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए और जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई तुरंत की जाए।