लखनऊ। पश्चिम उत्तर प्रदेश से अपनी पैठ बनाने के बाद अब राष्ट्रीय लोकदल (RLD) पूर्वांचल में सक्रिय हो गया है। पार्टी ने 14 राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति कर संगठन को मजबूत किया है, लेकिन इसका मुख्य फोकस उत्तर प्रदेश पर रहेगा।
केंद्रीय मंत्री और RLD के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी 15 मार्च को देवरिया में होने वाले सम्मेलन में हिस्सा लेकर पूर्वांचल की राजनीतिक स्थिति का आकलन करेंगे। इस दौरान वे किसानों और स्थानीय समर्थकों से मिलकर क्षेत्रीय मुद्दों को समझेंगे। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय भी अपनी चुनावी तैयारियों को लेकर देवरिया से सक्रिय नजर आएंगे।
जयंत चौधरी राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड और गुजरात सहित पूरे देश में संगठन विस्तार पर ध्यान दे रहे हैं। 1996 में स्थापित RLD ने पश्चिम यूपी में लंबे समय तक अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है और अब पार्टी पूर्वांचल में नई संभावनाओं को तलाश रही है।
पार्टी ने 2022 विधानसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन किया था, लेकिन पूर्वांचल की कुछ सीटों पर सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन किया गया, जिससे जयंत केंद्रीय मंत्री बने, जबकि प्रदेश में एक सीट मिलने के साथ विधायक अनिल कुमार मंत्री बने।
2027 विधानसभा चुनाव की संभावनाओं को देखते हुए, RLD पुराने और नए नेताओं की सक्रियता बढ़ा रही है। पार्टी पूर्वांचल, मध्य यूपी और बुंदेलखंड में अपनी उपस्थिति मजबूत कर एनडीए गठबंधन को सहयोग देने की योजना बना रही है।
इससे पहले जयंत चौधरी वाराणसी, सोनभद्र और बस्ती में सम्मेलनों का आयोजन कर चुके हैं, जबकि महासचिव त्रिलोक त्यागी पूरे प्रदेश के 18 मंडलों में संगठन को सक्रिय कर रहे हैं। पिछले डेढ़ दशक में RLD पूर्वांचल में अपनी पैठ बनाने का प्रयास करती रही है, लेकिन सपा, बसपा और भाजपा के प्रभाव के कारण पार्टी को व्यापक सफलता नहीं मिली।
पूर्व में 2007 में तत्कालीन अध्यक्ष अजित सिंह की अगुआई में पार्टी ने 254 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और 10 विधायक चुने गए थे। लेकिन 2017 में अकेले चुनाव लड़ने पर सिर्फ एक विधायक बना। अब RLD पूर्वांचल, मध्य यूपी और बुंदेलखंड में जनाधार बढ़ाकर पुनः राजनीतिक सक्रियता दिखाने की योजना बना रही है।