मुंबई: महाराष्ट्र के बारामती विधानसभा क्षेत्र में आगामी उपचुनाव ने राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर अब चुनावी जंग शुरू हो चुकी है।
कांग्रेस ने घोषणा की है कि वह इस सीट पर उम्मीदवार उतारेगी और इसके लिए पार्टी नेतृत्व से मंजूरी भी मिल चुकी है। वहीं, विपक्षी गठबंधन का एक अन्य घटक, शिवसेना (यूबीटी), अपने उम्मीदवार को लेकर फिलहाल सशंकित है और स्थिति का अवलोकन कर रहा है।
पवार परिवार का लंबे समय का दबदबा
बारामती विधानसभा सीट पर पिछले चार दशकों से पवार परिवार का प्रभाव रहा है। अजित पवार के निधन के बाद महायुति और शरद पवार गुट ने इसे निर्विरोध संपन्न कराने का प्रयास किया। सुनेत्रा पवार ने स्वयं उद्धव ठाकरे से समर्थन मांगा और परंपरा का हवाला देते हुए चुनाव को बिना प्रतिद्वंद्वी संपन्न कराने की गुजारिश की।
महाराष्ट्र की राजनीति में आम तौर पर यह परंपरा रही है कि किसी विधायक के निधन के बाद उसके परिवार के सदस्य को उम्मीदवार बनाए जाने पर अन्य दल प्रत्याशी नहीं उतारते। 2019 में अंधेरी (पूर्व) में हुई उपचुनाव में भी इसी परंपरा का पालन हुआ था।
कांग्रेस का कड़ा रुख और चुनावी रणनीति
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने साफ किया है कि पार्टी इस उपचुनाव में उम्मीदवार उतारेगी। कांग्रेस के इस कदम से महाविकास आघाड़ी के भीतर मतभेद भी उजागर हो रहे हैं। राकांपा शरद पवार के निर्देशों के अनुसार सुनेत्रा पवार के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेगी, जबकि शिवसेना (यूबीटी) अभी स्थिति का मूल्यांकन कर रही है।
बारामती उपचुनाव में अब तक सुनेत्रा पवार के खिलाफ पांच उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है, जिनमें अधिकांश बाहरी जिलों से हैं। मतदान 23 अप्रैल को होगा और मतगणना चार मई को की जाएगी। सभी की निगाहें कांग्रेस के उम्मीदवार की घोषणा और उद्धव ठाकरे के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं।