संभल जिले के कसेरुआ गांव में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने एक बार फिर सख्त कार्रवाई करते हुए बुलडोजर अभियान चलाया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में राजस्व और प्रशासनिक टीमों ने सरकारी जमीन से अवैध कब्जों को हटवाया और क्षेत्र को खाली कराया।

कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि पर किए गए अवैध कब्जों के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

मजार हटाने की कार्रवाई पर प्रशासन का पक्ष

एसपी संभल कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि शासन के निर्देशों के तहत सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि गांव बाघऊ में राजस्व विभाग द्वारा की गई पैमाइश में यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित भूमि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है और उस पर मजार बनी हुई थी। इसके बाद अदालत के आदेश के आधार पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।

उन्होंने बताया कि कार्रवाई से पहले मजार की देखरेख करने वाले को नोटिस भी जारी किया गया था।

डीएम कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई

इससे पहले बबराला थाना क्षेत्र के बाघऊ गांव में शुक्रवार को प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर मजार को ध्वस्त कर दिया था। अधिकारियों के अनुसार यह निर्माण सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर किया गया था। डीएम कोर्ट के आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई।

कार्रवाई के दौरान जिलाधिकारी और एसपी मौके पर मौजूद रहे। राजस्व टीम और चार थानों की पुलिस की तैनाती के बीच करीब एक घंटे तक चली इस कार्रवाई में लगभग 100 वर्ग गज सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया।

जमीन सरकारी होने की पुष्टि

अधिकारियों के अनुसार गाटा संख्या 592 की भूमि राजस्व अभिलेखों में सरकारी संपत्ति के रूप में दर्ज है। करीब एक दशक पहले इस जमीन पर कथित रूप से मजार का निर्माण किया गया था, जिसकी देखरेख गांव के ही निवासी मुजावर अब्दुल अजीज करते थे।

लेखपाल की शिकायत के बाद मामला पहले तहसील न्यायालय और फिर जिलाधिकारी कोर्ट तक पहुंचा। सुनवाई के दौरान भूमि के सरकारी होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया गया।

कार्रवाई पर प्रशासन का रुख

डीएम ने मौके पर कहा कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि तालाबों, चकरोड़ और अन्य सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने की कार्रवाई तेज की जा रही है।

मौके से देखरेखकर्ता गायब

स्थानीय लोगों के अनुसार कार्रवाई की जानकारी मिलते ही मजार की देखरेख करने वाले मुजावर अब्दुल अजीज मौके से चले गए। बाद में उन्होंने दावा किया कि यह स्थान लंबे समय से आस्था से जुड़ा रहा है और यहां श्रद्धालु मन्नत मांगने आते थे, हालांकि इस संबंध में प्रशासन को कोई आधिकारिक आपत्ति नहीं दी गई थी।

मंदिर पक्ष का दावा

पास स्थित खेरेश्वर शिव मंदिर के महंत रामगिरी महाराज ने कहा कि शुरुआत में यहां केवल कुछ ईंटें रखी गई थीं, जिसके बाद धीरे-धीरे निर्माण बढ़ता गया। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई को अदालत के आदेश के अनुसार बताया। मंदिर के आसपास गोशाला और पंचायत सचिवालय भी स्थित हैं, जिसके चलते स्थानीय लोग इस अतिक्रमण को लेकर लंबे समय से आपत्ति जताते रहे थे।