उत्तर प्रदेश के वाराणसी में शैक्षणिक संस्थानों के जरिए उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक सेतु को और मजबूत करने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, शहर के स्कूलों और कॉलेजों में नियमित तौर पर तमिल भाषा की कक्षाएं शुरू करने की संभावना पर गंभीरता से विचार चल रहा है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को दक्षिण भारतीय संस्कृति और तमिल भाषा से परिचित कराना है।

यह प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘काशी-तमिल संगमम’ की सोच से जुड़ा हुआ है। हाल ही में प्रधानमंत्री ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में गवर्नमेंट क्वींस कॉलेज की छात्रा पायल पटेल का उल्लेख किया था, जिन्होंने कम समय में तमिल भाषा सीखकर उदाहरण पेश किया।

प्रधानमंत्री के इस संदेश से प्रेरणा लेते हुए गवर्नमेंट क्वींस कॉलेज में प्रतिदिन शाम के समय तमिल भाषा की कक्षाएं शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। कॉलेज के प्रधानाचार्य सुमित कुमार ने बताया कि जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से संस्थान को इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश मिले हैं।

तमिलनाडु भेजे जा सकते हैं शिक्षक

अधिकारियों के अनुसार, इस सांस्कृतिक आदान-प्रदान योजना के तहत वाराणसी से करीब 50 शिक्षकों को तमिलनाडु भेजे जाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है, जहां वे हिंदी भाषा का अध्यापन करेंगे। इस विषय पर मंडलायुक्त और जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई बैठकों में चर्चा हो चुकी है।

प्रधानाचार्य सुमित कुमार ने बताया कि तमिलनाडु की शिक्षिका संध्या कुमार साईं से संपर्क किया गया है, जिन्होंने पहले छात्रा पायल पटेल को तमिल सिखाया था। उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से कक्षाएं लेने की सहमति भी दी है। इसके अलावा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के तमिल विभाग की ओर से भी सहयोग का आश्वासन मिला है।

सांस्कृतिक गतिविधियों से बढ़ रही नजदीकी

हाल ही में कॉलेज के छात्रों ने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के जरिए काशी और तमिलनाडु के संबंधों को दर्शाया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को तमिल भाषा में नववर्ष की शुभकामनाएं दी गईं। कार्यक्रम में तमिल संगीत पर रंगोली और नृत्य प्रस्तुतियां भी हुईं, जिसका नेतृत्व पायल पटेल ने किया।

वहीं, हरीश चंद्र गर्ल्स इंटर कॉलेज की प्रिंसिपल प्रियंका तिवारी ने बताया कि काशी-तमिल संगम के दौरान उनके विद्यालय में 15 दिनों का तमिल भाषा शिविर आयोजित किया गया था, जिसमें 50 छात्राओं ने भाग लिया। छात्राओं ने बाद में कविताओं और गीतों के माध्यम से अपनी सीख को प्रस्तुत किया।

औपचारिक पाठ्यक्रम की तैयारी

छात्राओं में भाषा सीखने के प्रति बढ़ते उत्साह को देखते हुए, कॉलेज प्रबंधन अगले शैक्षणिक सत्र से तमिल भाषा का विधिवत पाठ्यक्रम शुरू करने पर विचार कर रहा है।

गौरतलब है कि काशी-तमिल संगम एक विशेष सांस्कृतिक पहल है, जिसका उद्देश्य काशी और तमिलनाडु के बीच प्राचीन सभ्यतागत, शैक्षणिक और सांस्कृतिक संबंधों को उजागर करना है। इस कार्यक्रम के तहत दोनों क्षेत्रों के छात्र, शिक्षक, विद्वान और कलाकार भाषा, साहित्य और संस्कृति के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़ते हैं, जिससे राष्ट्रीय एकता और आपसी समझ को मजबूती मिलती है।