लखनऊ। गृह मंत्री अमित शाह की शनिवार दोपहर की लखनऊ यात्रा ने राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी। तीन बजे प्रदेश कार्यालय पहुंचने के बाद उन्होंने लगभग 50 मिनट तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, महामंत्री धर्मपाल सिंह, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित अन्य शीर्ष नेताओं के साथ बैठक की।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शाह की यह बैठक संगठन और सरकार के शीर्ष नेतृत्व को एकजुट करने और बेहतर समन्वय का संदेश देने की कोशिश थी। बैठक के दौरान उन्होंने छह महामंत्रियों का हालचाल भी जाना, जबकि अन्य वरिष्ठ अधिकारी कार्यालय में मौजूद रहे।

उत्तर प्रदेश के प्रभारी होने के नाते अमित शाह सूबे के राजनीतिक और भौगोलिक परिदृश्य से पूरी तरह परिचित हैं। उन्होंने 2014 में यूपी में पार्टी की रणनीति और 'अस्सी में अस्सी' फॉर्मूला लागू किया था और यूपी दिवस के कार्यक्रम में भी इसके अनुभव का जिक्र किया।

पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में मिशन-2027 के लक्ष्य को लेकर कई राजनीतिक चुनौतियां सामने हैं। एक ओर जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना है, वहीं चुनाव से पहले योगी मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चाएं तेज हैं।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि शाह की लखनऊ बैठक का असर अब संगठन और सरकार के भीतर बदलाव के निर्णयों में देखने को मिल सकता है। नई प्रदेश टीम और मंत्रिमंडल फेरबदल की संभावनाओं के बीच यह बैठक समय पर रणनीतिक संदेश भी साबित हो रही है।