24 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिए गए निलंबित आईपीएस मणिलाल पाटीदार ने एसआईटी के हर सवाल के जवाब में खुद को बेकसूर बताया। क्रशर कारोबारी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में 24 घंटे की पूछताछ के बाद रविवार शाम उसे लखनऊ जेल में दाखिल करा दिया गया। शनिवार को रिमांड मंजूर होने के बाद प्रयागराज के एसपी क्राइम सतीश चंद के नेतृत्व में एसआईटी ने शाम छह बजे उसे पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिया था। इसके बाद उसे महोबा ले जाया गया। वहां मुकदमे के संबंध में पूछताछ की गई। उधर, महोबा पुलिस ने भी उसका बयान दर्ज किया। 

सूत्रों का कहना है कि एसआईटी के हर सवाल के जवाब में पाटीदार ने खुद को बेकसूर बताया। अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया। 20 घंटे से ज्यादा तक चली पूछताछ में उससे क्रशर कारोबारी की मौत से जुडे़ मामले को लेकर कई सवाल दागे गए।

एसआईटी की ओर से पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान सामने आए तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर अब पूरक चार्जशीट दाखिल की जाएगी। गौरतलब है कि काफी कोशिशों के बाद भी हाथ नहीं लगने पर एसआईटी ने बिना गिरफ्तारी ही पाटीदार के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी थी। सरेंडर करने के बाद एसआईटी ने कोर्ट के आदेश पर इस मामले की अग्रिम विवेचना शुरू की। एसपी क्राइम सतीश चंद ने बताया कि अग्रिम विवेचना में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। 

दो साल तक छकाता रहा था आरोपी
20 अक्तूबर 2020 को जोनल एसआईटी गठित कर क्रशर प्लांट कारोबारी की मौत के मामले में दर्ज मुकदमे की विवेचना सौंपी गई थी। दो सदस्यीय जोनल एसआईटी में प्रयागराज में तैनात रहे तत्कालीन एसपी क्राइम आशुतोष मिश्र को मुख्य विवेचक बनाया गया था। उनके तबादले के बाद वर्तमान एसपी क्राइम सतीश चंद ने विवेचना शुरू की थी। एसआईटी ने कुर्की की कार्रवाई भी की लेकिन पाटीदार का कुछ पता नहीं चला था। लगभग दो साल तक धूल फांकने के बाद भी पाटीदार हाथ नहीं आए, जिसके बाद उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई थी। अब कोर्ट की अनुमति से मामले की अग्रिम विवेचना की जा रही है।

परिजनों ने रेंज एसआईटी पर उठाए थे सवाल
विवेचना जोनल एसआईटी को सौंपने का निर्णय रेंज एसआईटी पर मृतक कारोबारी के परिजनों की ओर से सवाल उठाए जाने के बाद लिया गया था। गौरतलब है कि पहले विवेचना रेंज स्तर पर गठित एसआईटी कर रही थी। इसी दौरान मृतक कारोबारी के भाई और मुकदमा वादी रविकांत त्रिपाठी ने पत्र जारी कर विवेचना में जुटी रेंज एसआईटी की मंशा पर सवाल उठाए। आरोप लगाया गया कि एसआईटी की मंशा आरोपियों को गिरफ्तार करने की नहीं है। जिससे पूरा परिवार बेहद निराश व डरा हुआ है। परिवार ने आईजी चित्रकूट रेंज से यह भी अनुरोध किया कि विवेचना अन्यत्र से कराई जाए। मामला संज्ञान में आने के बाद उच्चाधिकारियों ने परिजनों से बात की। साथ ही उनकी सहमति पर विवेचना जोनल स्तर पर एसआईटी गठित की गई थी।