महोबा दौरे पर आए जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को उस वक्त अप्रत्याशित स्थिति का सामना करना पड़ा, जब युवा उद्घोष कार्यक्रम से लौटते समय भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत और उनके समर्थकों ने काफिले को रोक लिया। विधायक ने जल जीवन मिशन के तहत खोदी गई सड़कों और अधूरे कार्यों को लेकर नाराजगी जताई। इस दौरान समर्थकों और सुरक्षा कर्मियों के बीच नोकझोंक भी हुई।
विधायक बोले – जनता की आवाज उठाना मेरा कर्तव्य
विधायक बृजभूषण राजपूत ने कहा कि उन्हें जनता की सेवा के लिए चुना गया है और यदि जनता की समस्याओं को उठाने के लिए मंत्री को रोकना पड़े, तो वह पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि नमामि गंगे योजना बीते छह वर्षों से चल रही है, लेकिन गांवों में सड़कें आज भी खुदी पड़ी हैं। पाइपलाइन में लीकेज, जगह-जगह जलभराव और टंकियों से पानी टपकने जैसी कई शिकायतें हैं। विधायक के मुताबिक उन्होंने ये सारी बातें मंत्री के सामने रखी हैं, जिन्होंने समस्याओं के समाधान के लिए 20 दिन का समय मांगा है।
राजपूत ने यह भी कहा कि मंत्री ने मौके पर निरीक्षण और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन वे मौके पर नहीं गए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तय समय में काम नहीं हुआ तो वे दोबारा आंदोलन करेंगे, क्योंकि यह प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना से जुड़ा मामला है। विधायक के अनुसार बड़ी संख्या में ग्राम प्रधानों का वहां पहुंचना इस बात का संकेत है कि जमीनी हालात ठीक नहीं हैं।
पार्टी संगठन ने जताई नाराजगी
इस घटनाक्रम पर प्रदेश भाजपा संगठन ने फिलहाल सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जिस तरीके से मंत्री का रास्ता रोका गया, उसे अनुशासनहीन माना गया है। नेतृत्व इस मामले में विधायक से स्पष्टीकरण मांग सकता है।
अखिलेश यादव ने साधा निशाना
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा को घेरते हुए कहा कि अब भाजपा के भीतर ही टकराव खुलकर सामने आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के मंत्री और विधायक विकास की जगह आपसी खींचतान में लगे हुए हैं। अखिलेश ने कहा कि अगर एक ही पार्टी के लोग एक-दूसरे पर उंगली उठा रहे हैं, तो यह सरकार की विफलता का साफ संकेत है।
उन्होंने यह भी कहा कि महोबा की घटना सिर्फ एक उदाहरण है, राज्य के कई इलाकों में हालात ऐसे ही हैं और जनता की नाराजगी बढ़ती जा रही है। अखिलेश ने व्यंग्य करते हुए कहा कि भाजपा को अब अपने ही टूटे सिस्टम को संभालने के लिए ‘बुलडोजर’ ढूंढना पड़ेगा।